पशुपालक सावधान: खेतों की मेड़ पर उगने वाले ये पौधे हो सकते हैं आपके मवेशियों के लिए काल मध्य प्रदेश एक महीने पहले 58
खेतों और चरागाहों में उगने वाले कुछ सामान्य दिखने वाले पौधे मवेशियों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। विशेषज्ञ पशुओं को इनसे बचाने के उपाय और जहर के असर को कम करने के तरीके बता रहे हैं।

पशुओं के लिए क्यों खतरनाक हैं ये पौधे

पशुपालकों के लिए उनके मवेशी परिवार का हिस्सा होते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में अनजाने में की गई एक छोटी सी गलती बेजुबान जानवरों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। सतना के पशु चिकित्सक डॉ. बालेंद्र सिंह के अनुसार, हमारे आसपास कई ऐसे पौधे उगते हैं जो देखने में सामान्य लगते हैं, लेकिन इनमें घातक रसायन होते हैं। पशुओं के लिए गाजर घास, लंटाना कैमरा, मदार, बेशराम, धतूरा, अरंडी और घुटने से छोटी ज्वार की कोपलें बेहद खतरनाक हैं।

बरसात के मौसम में बढ़ता है खतरा

बारिश शुरू होते ही खेतों की मेड़ों और चरागाहों में ये जहरीले पौधे तेजी से पनपते हैं। भूखे पशु जब इन्हें खा लेते हैं, तो इनमें मौजूद जहर जैसे लंटाना में लैंटैडीन, अरंडी में रिसिन और ज्वार की कोपलों में सायनाइड सीधे रक्त प्रवाह में मिलकर ऑक्सीजन की सप्लाई रोक देते हैं। इससे लिवर फेल हो जाता है और पशु की कुछ ही घंटों में दम घुटने से तड़पकर मौत हो सकती है।

पशुपालकों के लिए बचाव के महत्वपूर्ण उपाय

पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है:

  • पशुओं को खाली पेट चरने के लिए बाहर न भेजें, पहले घर पर थोड़ा सूखा भूसा या चारा खिलाएं।
  • खेतों की मेड़ और बाड़े के आसपास उगने वाली गाजर घास, बेशराम और लंटाना जैसी झाड़ियों को जड़ से उखाड़कर नष्ट कर दें।
  • छोटी ज्वार की फसल को पशुओं की पहुंच से दूर रखें।
  • चारे को नाद में डालने से पहले अच्छी तरह जांच लें कि उसमें कोई जहरीली पत्ती तो नहीं मिली है।

जहर का असर होने पर क्या करें

यदि पशु ने गलती से जहरीली पत्ती खा ली है, तो पशु चिकित्सक के आने तक ये कदम उठाएं:

  • सक्रिय चारकोल पाउडर: लकड़ी के कोयले को बारीक पीसकर पानी में मिलाकर पिलाएं, यह पेट में जहर को सोखने का काम करता है।
  • मीठा सोडा: यदि पशु का पेट फूल रहा है, तो 50 से 100 ग्राम मीठा सोडा पानी में घोलकर पिलाएं।
  • सिरका या इमली का पानी: ज्वार की कोपलों के जहर (सायनाइड) को काटने के लिए 100 से 200 मिलीलीटर सिरका या इमली का खट्टा पानी तुरंत पिलाएं।
  • प्राथमिक सावधानी: पशु के मुंह में फंसी बची हुई पत्तियां निकालें और उसे ठंडी या छायादार जगह पर रखें। डॉक्टर के आने तक उसे ठोस चारा या दाना न खिलाएं।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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