बरसात में पशुओं पर मंडराया बीमारियों का खतरा: गलाघोटू से 24 घंटे में मौत, लंगड़ा बुखार और खुरपका-मुंहपका भी घातक; जानिए लक्षण और बचाव झारखंड एक घंटा पहले 2
बरसात के मौसम में नमी, कीचड़ और दूषित पानी के कारण पशुओं में संक्रमण तेजी से फैलता है। गलाघोटू जैसी बीमारी तो 24 घंटे के भीतर पशु की जान ले सकती है, जिससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

बारिश का मौसम किसानों और पशुपालकों के लिए राहत भले लेकर आता हो, लेकिन यही समय पशुओं की सेहत के लिहाज से सबसे चुनौतीपूर्ण साबित होता है। लगातार होती बारिश से चारों ओर नमी, कीचड़, गंदगी और दूषित पानी का जमावड़ा हो जाता है, जिससे संक्रमण तेजी से फैलता है। ऐसे हालात में पशु आसानी से बीमार पड़ जाते हैं और कई बार उनकी जान तक चली जाती है। इसका सीधा असर पशुपालकों की कमाई पर पड़ता है और उन्हें भारी आर्थिक चोट झेलनी पड़ती है।

विशेषज्ञ की चेतावनी

पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार के अनुसार बरसात के दौरान पशुओं में कई गंभीर रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने इस मौसम में फैलने वाली प्रमुख बीमारियों, उनके लक्षण और बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की, ताकि पशुपालक समय रहते सतर्क हो सकें।

गलाघोटू: 24 घंटे में जानलेवा

बरसात की सबसे खतरनाक बीमारियों में गलाघोटू को गिना जाता है। यह संक्रमण इतनी तेजी से फैलता है कि पशु को संक्रमित होने के महज 24 घंटे के भीतर मौत हो सकती है। इस रोग में पशु को तेज बुखार आता है, गले और गर्दन के हिस्से में सूजन आ जाती है और सांस लेने में कठिनाई होने लगती है। समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है।

लंगड़ा बुखार के लक्षण

लंगड़ा बुखार भी बरसात के मौसम में पशुओं को अपनी चपेट में लेता है। इस बीमारी में पशु के पैरों और मांसपेशियों में सूजन आ जाती है, जिससे वह लंगड़ाकर चलने लगता है। साथ ही तेज बुखार बना रहता है और पशु चारा खाना तक छोड़ देता है। यह रोग भी समय रहते इलाज न होने पर घातक साबित हो सकता है।

खुरपका-मुंहपका का प्रकोप

खुरपका-मुंहपका रोग इस मौसम में तेजी से फैलने वाला संक्रमण है। इसमें पशु के मुंह और खुरों में छाले पड़ जाते हैं, मुंह से लगातार लार बहती है और पशु ठीक से खा-पी नहीं पाता। दर्द के कारण पशु चलने-फिरने में भी असमर्थ हो जाता है, जिससे उसका दूध उत्पादन और कार्यक्षमता दोनों प्रभावित होती है।

बचाव के जरूरी उपाय

विशेषज्ञ के मुताबिक इन बीमारियों से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि पशुओं को साफ-सुथरे और सूखे स्थान पर रखा जाए। पशुशाला में पानी या कीचड़ जमा न होने दें और नियमित रूप से सफाई करें। पशुओं को हमेशा स्वच्छ पानी और संतुलित चारा दें। समय-समय पर पशुओं का टीकाकरण कराना सबसे कारगर बचाव है।

तुरंत लें चिकित्सकीय सलाह

पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि किसी भी पशु में बुखार, सूजन, लंगड़ाहट, मुंह से लार या खाना छोड़ने जैसे लक्षण दिखते ही बिना देरी किए नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें। समय पर इलाज और सही देखभाल से न केवल पशु की जान बचाई जा सकती है, बल्कि पशुपालकों को होने वाले आर्थिक नुकसान से भी बचा जा सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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