झारखंड
2 घंटे पहले
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गांव-देहात के इलाकों में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला महुआ पशुओं के लिए बेहद पौष्टिक आहार माना जाता है। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इसे 'पशुओं की किशमिश' तक कहा जाता है, क्योंकि इसमें ऐसे कई पोषक तत्व मौजूद रहते हैं जो पशुओं की सेहत और उनकी उत्पादन क्षमता को निखारने में मददगार साबित होते हैं।
महुआ क्यों है पशुओं के लिए प्राकृतिक टॉनिक
श्री कोडरमा गौशाला के पशु विशेषज्ञ रजनीश कुमार ने बातचीत में बताया कि महुआ में विटामिन, मिनरल्स और प्राकृतिक ऊर्जा देने वाले तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसी खूबी की वजह से इसे पशुओं के लिए एक प्राकृतिक टॉनिक के रूप में देखा जाता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसका इस्तेमाल हमेशा सीमित मात्रा में ही किया जाना चाहिए।
दूध उत्पादन बढ़ाने में मददगार
विशेषज्ञ के अनुसार किसी भी पोषक तत्व की अधिक मात्रा नुकसानदेह हो सकती है और यही नियम महुआ पर भी लागू होता है। इसलिए पशुपालकों को अपने पशुओं की उम्र, वजन और जरूरत के हिसाब से ही महुआ देना चाहिए।
उन्होंने बताया कि दुधारू पशुओं को महुआ खिलाने पर दूध उत्पादन में सकारात्मक असर देखने को मिलता है। वहीं जो पशु दूध नहीं देते, उनके लिए यह शरीर की ताकत बढ़ाने, ऊर्जा बनाए रखने और सामान्य स्वास्थ्य सुधारने में मददगार साबित हो सकता है।
तरीका बताते हुए उन्होंने कहा कि सूखे महुआ को पहले पानी में भिगो देना चाहिए और इसके बाद एक पशु को सुबह के समय लगभग 100 ग्राम की मात्रा में खिलाना चाहिए। इस तरीके से महुआ आसानी से पच जाता है और उसका पोषण भी बेहतर ढंग से पशु को मिलता है।
पाचन तंत्र को रखता है दुरुस्त
रजनीश कुमार ने बताया कि महुआ के नियमित लेकिन नियंत्रित सेवन से पशुओं का पाचन तंत्र बेहतर बना रहता है। यह पेट साफ रखने में सहायक है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में भी कारगर माना जाता है।
मौसम के अनुसार बरतें सावधानी
उन्होंने मौसम के हिसाब से एहतियात बरतने की सलाह भी दी। उनके मुताबिक महुआ की तासीर गर्म होती है, इसलिए गर्मियों में इसे बहुत अधिक मात्रा में नहीं देना चाहिए, क्योंकि ज्यादा सेवन से पशुओं को परेशानी हो सकती है। वहीं सर्दियों में सीमित मात्रा में महुआ खिलाने से पशुओं को अंदरूनी गर्माहट और अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है।
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