गोबर से बनेगी जैविक खाद, किसानों की हर महीने होगी हजारों की अतिरिक्त कमाई मध्य प्रदेश 2 घंटे पहले 3
मध्य प्रदेश के प्रगतिशील किसान के अनुसार दुधारू पशुओं के गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाकर किसान खेती की लागत घटा सकते हैं और हर महीने 18 से 20 हजार रुपये तक अतिरिक्त आमदनी कमा सकते हैं।

मध्य प्रदेश में पशुपालन से जुड़े किसान अपने दुधारू पशुओं से मिलने वाले गोबर का सही उपयोग कर अतिरिक्त आमदनी का रास्ता खोल सकते हैं। प्रगतिशील किसान मनसुख लाल कुशवाहा का कहना है कि गोबर को वर्मी कंपोस्ट खाद में बदलकर न सिर्फ कमाई बढ़ाई जा सकती है, बल्कि खेती में आने वाला खर्च भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।

वर्मी कंपोस्ट क्यों है फायदेमंद

वर्मी कंपोस्ट एक जैविक खाद है, जो मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाती है और फसलों की गुणवत्ता में सुधार लाती है। इसके इस्तेमाल से रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता भी घटती है, जिससे लंबे समय में खेत और फसल दोनों स्वस्थ रहते हैं।

कितने गोबर से कितनी खाद

कुशवाहा के मुताबिक 6 दुधारू पशुओं से रोजाना करीब 175 किलो गोबर मिल जाता है। इतने गोबर से एक महीने में लगभग 20 से 25 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट तैयार की जा सकती है, जिसकी बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है।

हर महीने की अतिरिक्त कमाई

बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए किसान वर्मी कंपोस्ट बेचकर हर महीने 18 से 20 हजार रुपये तक की अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। खास बात यह है कि वर्मी कंपोस्ट इकाई लगाने में बहुत अधिक खर्च नहीं आता।

केंचुओं से भी आय

इस खाद को तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले केंचुओं की बिक्री से भी किसानों के लिए आमदनी का एक और जरिया बन जाता है। इस तरह कम लागत में किसान एक साथ कई स्तरों पर लाभ उठा सकते हैं।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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