उपनाम: पर्यावरण संरक्षण
World Environment Day: मिठाई की दुकान छोड़ी, साइकिल थामी और निकल पड़े पर्यावरण की मुहिम पर — आज देश-दुनिया में हो रही चर्चा
बाड़मेर के नरपतसिंह राजपुरोहित ने मिठाई की दुकान का काम छोड़कर साइकिल से देशभर में पर्यावरण जागरूकता फैलाई और ढाई लाख पौधे लगाए. उनका नाम इंडिया बुक, एशिया बुक और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है.
'मोदी के नेतृत्व ने बढ़ाया प्रधानमंत्री पद का सम्मान, सनातन ने दिया पर्यावरण रक्षा का पाठ', सीएम मोहन यादव का बड़ा संदेश
विश्व पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सनातन संस्कृति और पर्यावरण के अटूट रिश्ते पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने मध्यप्रदेश को मिले दो राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कारों को जनता और शासन की साझी उप...
ग्रेटर नोएडा में 10 जून से ई-बस सेवा: लोग बोले- 'महिलाओं को राहत, मगर रूट बढ़ाना जरूरी'
ग्रेटर नोएडा में 10 जून से शुरू हो रही इलेक्ट्रिक बस सेवा का शहरवासियों, उद्यमियों और सामाजिक संगठनों ने स्वागत किया है, लेकिन उनका कहना है कि रूटों को औद्योगिक क्षेत्रों, प्रमुख सेक्टरों और गांवों तक बढ़ाने पर ही यह पहल पूरी तरह सफल होगी।
World Environment Day 2026: बदलते पर्यावरण का जीवन पर गहरा असर, इन 7 रूपों में महसूस हो रहा बदलाव
हर साल 5 जून को मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस लोगों को प्रकृति के संरक्षण के लिए जागरूक करता है। बिगड़ते पर्यावरण का असर अब जल, जंगल, जीव-जंतु और इंसानी जीवन पर साफ दिखाई देने लगा है।
13 साल की उम्र में थामी पर्यावरण की कमान, झारखंड के इस 'ट्री मैन' की कहानी आज पाठ्यपुस्तकों में
पलामू के डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने मात्र 13 साल की उम्र में 'जंगल लगाओ-जंगल बचाओ' अभियान शुरू किया था और आज वे झारखंड के 'ट्री मैन' के रूप में जाने जाते हैं। उनका सफर देश से लेकर विदेशों तक फैल चुका है और CBSE तथा ICSE की किताबों में भी उनका उल्लेख है।
कैंसर को मात देकर हरियाली से जुड़े कोडरमा के 71 वर्षीय शिक्षाविद्, कबाड़ से सजाया 'मीनाक्षी गार्डन'
कोडरमा के झुमरी तिलैया निवासी डॉ. अरुण मिश्रा ने बेकार वस्तुओं से एक खूबसूरत मीनाक्षी गार्डन तैयार किया है. कैंसर की चौथी स्टेज से उबर चुके इस शिक्षाविद् के लिए बगीचे की हरियाली किसी थेरेपी से कम नहीं रही.
मेरठ की ईहा दीक्षित को 'ग्रीन गर्ल' क्यों कहते हैं लोग, पीएम मोदी भी हैं इनके मुरीद
मेरठ की ईहा दीक्षित साढ़े चार साल की उम्र से लगातार पौधारोपण कर रही हैं और उनके लगाए पौधे अब विशाल पेड़ों का रूप ले चुके हैं। इस लगन के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।
जयपुर की 80 वर्षीय 'सुपर दादी' फूल कंवर: पेंशन से लगाए 11 हजार पौधे, नेशनल रेस में जीता गोल्ड मेडल
जयपुर की 80 वर्षीय फूल कंवर पिछले 19 वर्षों से अपनी पेंशन के पैसों से 11 हजार से अधिक पौधे लगा चुकी हैं और 75 साल की उम्र में दौड़ में राष्ट्रीय गोल्ड मेडल भी जीत चुकी हैं।
खैरथल का 'ट्री-मैन' सुरेंद्र: 46 साल से बिना फोन और वाहन के लगा रहे हरियाली की मुहिम, बदल दी पहाड़ों की सूरत
खैरथल-तिजारा के पेहल गांव के सुरेंद्र सैन पिछले 46 वर्षों से बिना मोबाइल और वाहन के पर्यावरण संरक्षण में जुटे हैं और अब तक 1.10 लाख से अधिक पौधे लगा चुके हैं। तपती गर्मी में 8-10 किमी दूर से पानी लाकर वे पहाड़ों पर पौधों को सींचते हैं।
हरियाली की ओर बढ़ता भीलवाड़ा, लाखों पौधों के साथ बड़े वृक्षारोपण अभियान की तैयारी
टेक्सटाइल सिटी के नाम से मशहूर भीलवाड़ा को हरा-भरा बनाने के लिए जिले की 17 नर्सरियों में लाखों पौधे तैयार किए गए हैं, जिन्हें आने वाले कार्यक्रमों में अलग-अलग जगहों पर लगाया जाएगा।
CM मोहन यादव के काफिले में जुड़ी नई इलेक्ट्रिक कार, नंबर प्लेट में छिपा खास संदेश, जानिए कितनी है रेंज
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव अपने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहन शामिल करने वाले देश के पहले सीएम बन गए हैं। महिंद्रा की XEV 9e कार का नंबर MP-02-VB-2047 भी एक खास संदेश देता है।
मोहन यादव बने देश के पहले मुख्यमंत्री जिन्होंने काफिले में जोड़ी इलेक्ट्रिक कार, पीएम मोदी की अपील पर अमल
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने काफिले में महिंद्रा की XEV 9e इलेक्ट्रिक कार शामिल कर ली है और ऐसा करने वाले वे देश के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मितव्ययता की अपील का पालन करते हुए उन्होंने 3 जून को यह कदम उठ...
उज्जैन: महाकाल को अर्पित फूलों से बन रहे अगरबत्ती और गुलाल, कई लोगों को मिला रोजगार
उज्जैन के मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों को रिसाइकिल कर अगरबत्ती, धूप, गुलाल और गुलाब जल जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इस पहल से जहां पर्यावरण संरक्षण हो रहा है, वहीं महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर भी मिल रहा है।
मुजफ्फरपुर की शाही लीची और गया के बोधिवृक्ष के बाद अब वीर कुंवर सिंह — कबाड़ से बिहार की पहचान गढ़ रहा यह इंजीनियर
भोजपुर के युवा इंजीनियर प्रशांत कुमार 'वेस्ट टू वंडर' थीम पर कबाड़ से बिहार की सांस्कृतिक धरोहरों की भव्य कलाकृतियां तैयार कर रहे हैं और इस पहल से 15 से अधिक स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिल रहा है।