'साहब, पेड़ मत काटिए, उसे कहीं और लगा दीजिए', सुशासन तिहार में पर्यावरण प्रेमी की अनोखी गुहार छत्तीसगढ़ एक महीने पहले 27
मुंगेली के लोरमी में सुशासन तिहार शिविर के दौरान पर्यावरण प्रेमी मनमोहन दास ने सड़क चौड़ीकरण की भेंट चढ़ रहे एक पुराने बरगद को काटने के बजाय दूसरी जगह शिफ्ट कराने का आवेदन दिया है। प्रशासन ने मामले की जांच का भरोसा दिलाया है।

छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के लोरमी में आयोजित सुशासन तिहार के तहत लगे शिविर में एक ऐसा आवेदन पहुंचा, जिसने सबका ध्यान खींच लिया। यहां पर्यावरण प्रेमी मनमोहन दास ने एक विशेष प्रजाति के बड़े बरगद वृक्ष को काटने के बजाय उसे किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कराने की मांग रखी है। पेड़ों की लगातार हो रही कटाई से आहत मनमोहन दास का यह आवेदन इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।

क्यों दिया गया अनोखा आवेदन

मनमोहन दास का कहना है कि लोरमी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण को भारी क्षति पहुंच रही है। उन्होंने बताया कि जिस बरगद की बात वे कर रहे हैं, वह बेहद पुराना और महत्वपूर्ण है, इसलिए उसे बचाया जाना जरूरी है।

उनका तर्क है कि पेड़ को काटने के बजाय तकनीकी सहायता से उसे सुरक्षित ढंग से दूसरी जगह लगाया जा सकता है। इस तरह न तो विकास कार्य रुकेंगे और न ही पर्यावरण को नुकसान होगा।

पूरे क्षेत्र में हो रही चर्चा

शिविर में दिए गए इस आवेदन की चर्चा अब समूचे इलाके में है। स्थानीय नागरिक भी इस पहल के साथ खड़े नजर आ रहे हैं और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर चिंता जता रहे हैं।

लोगों का मानना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन उसके साथ-साथ पर्यावरण का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। उनका कहना है कि अगर पेड़ों को बचाने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाई जाए, तो प्रकृति और विकास दोनों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

प्रशासन ने दिया जांच का भरोसा

आवेदन को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने मामले की जांच कराने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि संबंधित विभाग से रिपोर्ट मंगाई जाएगी और पेड़ को बचाने के लिए हर संभव कोशिश तथा बेहतर विकल्पों पर विचार किया जाएगा।

यह मामला अब पर्यावरण संरक्षण और विकास कार्यों के बीच संतुलन को लेकर एक बड़ी बहस का केंद्र बन गया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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