उपनाम: पर्यावरण संरक्षण
Donkey Leaf: पत्ता मिट्टी में डालें और उग आएगा नया पौधा, मात्र ₹20 में हो सकती है अच्छी कमाई
पटना के Naresh Agarwal ने अपनी छत पर Donkey Leaf नाम का एक ऐसा पौधा लगाया है जिसके पत्तों से खुद-ब-खुद नए पौधे निकल आते हैं। वे इन्हें मात्र ₹20 प्रति पौधे में बेचते हैं और उस कमाई से पटना की सड़कों पर पेड़ लगाते हैं।
शिप्रा आरती बनी पर्यावरण का मंच, ढाई लाख श्रद्धालुओं ने ली नदी स्वच्छता की शपथ
उज्जैन के रामघाट पर मां शिप्रा की संध्या आरती अब आस्था के साथ-साथ जल संरक्षण का प्रभावशाली अभियान बन चुकी है। 25 अप्रैल से शुरू इस मिशन में अब तक ढाई लाख से अधिक श्रद्धालु नदियों को स्वच्छ रखने का संकल्प ले चुके हैं।
संतान नहीं हुई तो पेड़ों को बनाया परिवार, रीवा के दीनानाथ-ननकी ने 105 एकड़ बंजर ज़मीन पर उगा दिया 'प्रेम वन'
रीवा के एक दंपती दीनानाथ कोल और ननकी देवी ने संतान न होने के दुख को प्रेरणा में बदलते हुए 10 हजार पौधे लगाकर 105 एकड़ बंजर भूमि को घने जंगल में बदल दिया। आज इस 'प्रेम वन' को देखने दूर-दूर से लोग पहुँचते हैं।
नैनीताल में अनोखी पहल: बोतल लौटाने पर मिलेंगे 2 रुपये, क्यूआर कोड से सीधे खाते में पहुंचेगी राशि
सरोवर नगरी नैनीताल को स्वच्छ बनाने के लिए नगर पालिका ने प्लास्टिक और कांच के कचरे की खरीद शुरू की है, जिसमें हर बोतल या निर्धारित वस्तु पर 2 रुपये डिजिटल भुगतान किया जा रहा है।
यमुना की सफाई में बड़ी कामयाबी: 93,000 टन से ज्यादा कचरा हटाया, 1425 एकड़ जमीन कब्जामुक्त
दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने DDA के कामकाज की समीक्षा बैठक की, जिसमें यमुना के बाढ़ क्षेत्र से 93,000 टन से अधिक कचरा हटाने और करीब 1,425 एकड़ जमीन को कब्जे से मुक्त कराने की जानकारी दी गई।
भरतपुर में गौरैया को बचाने की प्रेरक पहल, घर-घर बने नन्हे घोंसले और लौट आईं चहचहाती चिड़ियां
भरतपुर में लोग गौरैया के संरक्षण के लिए अपने घरों, छतों और आंगनों में बर्ड हाउस लगा रहे हैं, जिससे इन नन्ही चिड़ियों को सुरक्षित ठिकाना मिल रहा है और पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है।
गाजियाबाद के 47 गांवों में लहलहाएंगे छोटे जंगल, औषधीय और फलदार पौधों से सुधरेगा पर्यावरण
गाजियाबाद की चयनित ग्राम पंचायतों में आधा से दो हेक्टेयर तक भूमि पर ग्राम वन विकसित किए जाएंगे। जुलाई से शुरू होने वाले इस अभियान में नीम, पीपल, बरगद और आम जैसे औषधीय व फलदार पौधे लगाए जाएंगे।
हाथों में दस्ताने और कचरा बैग, जेब में डिग्री: पाली को प्लास्टिक मुक्त बनाने जुटे युवाओं का दल
पाली जिले में उच्च शिक्षित और कामकाजी युवाओं का एक समूह शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए सड़कों पर उतरकर सफाई और जागरूकता अभियान चला रहा है।
विद्युतीकरण का दिखा असर: जोधपुर रेल मंडल ने दो साल में बचाया 2.84 करोड़ लीटर डीजल, पर्यावरण संरक्षण को मिली रफ्तार
जोधपुर रेल मंडल ने रेलवे नेटवर्क के तेज विद्युतीकरण के दम पर बीते दो वर्षों में करीब 2.84 करोड़ लीटर डीजल की बचत की है, जिससे ईंधन खर्च और कार्बन उत्सर्जन दोनों में उल्लेखनीय कमी आई है।
अंबाला एसडी कॉलेज का 'वेस्ट टू वेल्थ' मॉडल, वर्मी कंपोस्ट के साथ जल और ऊर्जा की बचत भी
अंबाला के सनातन धर्म कॉलेज ने मंदिरों और परिसर के जैविक कचरे को वर्मी कंपोस्ट खाद में बदलने के साथ-साथ वर्षा जल संरक्षण और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा का संदेश दिया है। यह खाद लोगों को निशुल्क भी उपलब्ध कराई जा रही है।
जमशेदपुर की खुशबू का अनोखा हुनर: कूड़े से ऐसी सजावट कि देखने वाले रह जाते हैं दंग
जमशेदपुर की खुशबू सिंह प्लास्टिक वेस्ट से सजावटी सामान और नारियल के छिलकों से पक्षियों के घोंसले बनाकर पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश कर रही हैं। अब तक वे 150 से अधिक घोंसले तैयार कर चुकी हैं।
साइकिल की चेन से गढ़ा पटना का मिनी गोलघर, देखते ही फोन निकाल लेते हैं लोग
पटना के जेपी गंगा पथ पर एक कलाकार ने पुरानी साइकिल-बाइक की चेन से गोलघर की हूबहू प्रतिकृति तैयार की है, जो अब राहगीरों और पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
बालोद में स्व-सहायता समूह की महिलाएं बीज उपचार से तैयार कर रहीं पौधे, जानें नारियल से लेकर पपीता तक के दाम
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में धरा क्लस्टर संगठन लाटाबोड़ से जुड़ी महिलाएं बीज उपचार कर विभिन्न प्रजातियों के पौधे तैयार कर रही हैं, जिन्हें बेचकर वे अतिरिक्त आय अर्जित करेंगी। नारियल, कटहल और मुनगा जैसे बड़े पौधे 200 रुपये में और नीम, इमली, पपीता व आम 50 रु...
बागेश्वर के पोखरी गांव में रिंगाल से बन रहे इको फ्रेंडली डस्टबिन, प्लास्टिक को कहा अलविदा
उत्तराखंड का पोखरी गांव अब प्लास्टिक और लोहे की जगह पहाड़ी रिंगाल से बनी टोकरियों को कूड़ेदान के रूप में अपना रहा है, जिससे स्थानीय शिल्प और पर्यावरण दोनों को बढ़ावा मिल रहा है।
सरहद के इस माड़साहब ने बदली धरती की रंगत, पहली तनख्वाह से बोई थी हरियाली की नींव
बाड़मेर के शिक्षक भैराराम भाखर बीते 26 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण को मिशन बनाकर जुटे हैं और अब तक करीब 4.65 लाख पौधे लगा चुके हैं। पहली सरकारी तनख्वाह से शुरू हुआ उनका यह सफर हर परिवार को प्रकृति से जोड़ने के संकल्प तक पहुंच गया है।