बंजर 172 एकड़ बनी हरियाली की मिसाल, पुलिस जवानों ने रोपे 16 हजार पौधे, उभरा नया ऑक्सीजन हब व्यापार एक घंटा पहले 2
ग्वालियर के तिघरा में कभी सूखी और वीरान पड़ी 172 एकड़ जमीन पर पुलिस प्रशिक्षण स्कूल के जवानों और अधिकारियों ने 16 हजार पौधे लगाकर हरियाली बिखेर दी है। बिना किसी सरकारी बजट के जनभागीदारी से खड़ा हुआ यह जंगल अब नए ऑक्सीजन हब के रूप में पहचान बना रहा है।

ग्वालियर के तिघरा क्षेत्र की जो जमीन कभी बंजर और सुनसान मानी जाती थी, वह आज हरियाली की चादर ओढ़े नजर आ रही है। पुलिस प्रशिक्षण स्कूल (पीटीएस) तिघरा के जवानों और अधिकारियों ने मिलकर यहां 16 हजार पौधे रोपे और पूरे इलाके की सूरत ही बदल डाली। पर्यावरण संरक्षण की यह कोशिश अब एक नए ऑक्सीजन हब के रूप में उभर रही है और जनभागीदारी से हरित विकास का सफल उदाहरण बन गई है।

बंजर जमीन से हरे-भरे जंगल तक का सफर

तिघरा पुलिस ट्रेनिंग सेंटर का जो इलाका पहले सूखी और बेकार पड़ी जमीन के नाम से जाना जाता था, वह अब हरियाली से भर चुका है। पीटीएस तिघरा के जवानों और अधिकारियों की मेहनत के चलते यहां करीब 16 हजार पौधे लगाए गए, जिनकी वजह से पूरे क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। यही इलाका अब एक नए ऑक्सीजन हब के तौर पर अपनी पहचान बना रहा है।

सम्मान समारोह में जुटे आला अधिकारी

इस उपलब्धि को रेखांकित करने के लिए मंगलवार को पीटीएस तिघरा में एक विशेष कार्यक्रम रखा गया। इसमें एडीजी राजाबाबू सिंह, ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान और आईजी ग्वालियर अरविंद सक्सेना समेत कई गणमान्य लोग शामिल हुए।

बिना सरकारी बजट, जनसहयोग से बना मॉडल

इस अभियान की नींव अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजाबाबू सिंह की पहल पर रखी गई थी। सबसे खास बात यह रही कि पूरे पौधारोपण में किसी सरकारी बजट का सहारा नहीं लिया गया। समाज के विभिन्न वर्गों और स्थानीय लोगों के सहयोग से पौधे लगाए गए और उनकी देखरेख का इंतजाम भी किया गया। महज एक साल के भीतर इन पौधों ने अच्छी बढ़त ली है और इलाके में हरियाली साफ झलकने लगी है।

172 एकड़ पर सौ प्रजातियों की कतार

तिघरा बांध के नजदीक लगभग 172 एकड़ भूमि लंबे अरसे से बंजर पड़ी हुई थी। इसी जमीन को हरा-भरा बनाने का सपना संजोया गया और जुलाई 2025 में बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान की शुरुआत हुई। इस अभियान के तहत नीम, पीपल, गुलर, करंज, शीशम, बांस, सागौन, सहजन, गुलमोहर, अमलतास, सफेद मूसली, इमली समेत कई अन्य प्रजातियों के पौधे लगाए गए। कुल मिलाकर करीब 100 अलग-अलग प्रजातियों के पौधों को यहां विकसित किया जा रहा है।

जैविक तरीके से हो रही देखभाल

इस अभियान में प्रशिक्षण ले रहे जवानों ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी की। अधिकारियों के मुताबिक पौधों की नियमित निगरानी की जा रही है और उन्हें पूरी तरह जैविक पद्धति से तैयार किया जा रहा है। पौधों की सुरक्षा और सिंचाई का भी पुख्ता प्रबंध किया गया है, जिसके चलते उनके जीवित रहने की दर काफी बेहतर रही है।

राज्य जैव विविधता पुरस्कार से सम्मान

इस हरित प्रयास की कामयाबी को देखते हुए मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड ने साल 2025 के राज्य स्तरीय जैव विविधता पुरस्कारों में एडीजी राजाबाबू सिंह को शासकीय श्रेणी में प्रथम पुरस्कार के लिए चुना है। इस पुरस्कार के तहत उन्हें एक लाख रुपये की राशि, प्रशस्ति पत्र और ट्रॉफी दी जाएगी। यह सम्मान जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रदान किया जा रहा है।

अगले चरण में 14 हजार और पौधों का लक्ष्य

एडीजी राजाबाबू सिंह का कहना है कि तिघरा के आसपास की जमीन को हरियाली से सराबोर करना उनका सपना था, जिसे सबके सहयोग से पूरा किया गया। उन्होंने बताया कि अब तक 16 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं और अगले चरण में 14 हजार और पौधे रोपने का लक्ष्य तय किया गया है। इन पौधों की देखभाल तब तक जारी रहेगी, जब तक वे पूरी तरह पेड़ नहीं बन जाते।

आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण

प्रकृति संवर्धन कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को पहाड़ियों और आसपास के इलाकों में पौधे लगाने और पर्यावरण की रक्षा के प्रति जागरूक किया गया। इस पहल का मकसद सिर्फ हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए बेहतर और साफ-सुथरा पर्यावरण तैयार करना भी है। एडीजी राजाबाबू सिंह ने कहा कि इस सफलता के असली नायक प्रशिक्षण ले रहे जवान और यहां तैनात अधिकारी हैं।

इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयास की कहानी

तिघरा की यह कहानी बताती है कि अगर दृढ़ इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयास हों, तो बंजर जमीन को भी हरियाली में बदला जा सकता है। आज तिघरा सिर्फ एक जलाशय नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का एक सफल मॉडल बनकर सामने आ रहा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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