गया की निराली 'मंथन वाटिका': हर पौधे पर दर्ज है किसी IAS अधिकारी का नाम, जानें वजह बिहार एक घंटा पहले 2
गया के हदहदवा पहाड़ी की तलहटी में बिपार्ड द्वारा विकसित मंथन वाटिका में करीब 200 पौधे लगाए गए हैं, जिनमें से लगभग हर पौधे के साथ किसी न किसी IAS अधिकारी का नाम जुड़ा है। कभी बंजर रही यह जमीन अब हरियाली से भर गई है।

बिहार के गया जिले में बनी एक अनूठी वाटिका इन दिनों लोगों की उत्सुकता का केंद्र बनी हुई है। गया शहर की हदहदवा पहाड़ी की तलहटी में बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) की ओर से इस "मंथन वाटिका" को आकार दिया गया है। यहां की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें लगे लगभग हर पौधे के साथ किसी न किसी आईएएस अधिकारी का नाम दर्ज है।

इस वाटिका में करीब 200 पौधे रोपे गए हैं। इन पर राज्य के डीएम, सचिव, कमिश्नर, अपर मुख्य सचिव और मुख्य सचिव स्तर तक के अधिकारियों के नाम वाली नेम प्लेट लगाई गई हैं। यहां सिर्फ फलदार पौधे ही नहीं, बल्कि छायादार और औषधीय प्रजातियों के पेड़ भी मौजूद हैं।

मंथन कार्यक्रम से जुड़ी है शुरुआत

पिछले वर्ष दिसंबर में गया स्थित बिपार्ड परिसर में राज्य के आईएएस अधिकारियों का मंथन कार्यक्रम आयोजित हुआ था। इसी आयोजन के दौरान बिहार के अलग-अलग जिलों और विभागों से पहुंचे अधिकारियों ने पौधारोपण अभियान में भाग लिया और 200 से अधिक पौधे लगाए। यहां लगे ज्यादातर पौधे अधिकारियों ने अपने हाथों से रोपे।

कभी बंजर थी यह जमीन

हदहदवा पहाड़ी की तलहटी का यह हिस्सा पहले बंजर भूमि के रूप में पहचाना जाता था। लेकिन बिपार्ड के प्रयासों और पौधारोपण अभियान के चलते अब यह पूरा इलाका हरियाली से ढक गया है।

वैज्ञानिक नाम की भी मिलती है जानकारी

मंथन वाटिका की एक और खासियत यह है कि हर पौधे के पास उसके सामान्य नाम के साथ-साथ उसका बॉटनिकल नाम भी अंकित किया गया है। इसका मकसद लोगों को, खासकर बच्चों को, विभिन्न पौधों और उनकी वैज्ञानिक पहचान से परिचित कराना है। यहां आने वाले परिवार प्रकृति के बीच समय बिताने के साथ पौधों के बारे में भी सीख सकते हैं।

दुर्लभ और औषधीय प्रजातियां

हाइटेक एग्रो विजन के अमित प्रकाश के अनुसार, इस वाटिका में बिहार के लगभग सभी आईएएस अधिकारियों का योगदान शामिल है। यहां गूलर, जामुन, महोगनी, अमरूद, चितवन, पीपल, बरगद और नीम सहित कई दुर्लभ एवं औषधीय प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। पौधों की सुरक्षा के लिए पूरे क्षेत्र की फेंसिंग भी कराई गई है।

बैठने और सुस्ताने का इंतजाम

वाटिका के अलावा इस इलाके को पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए भी आकर्षक बनाया गया है। जगह-जगह लाल पत्थरों से बने बैठने के स्थान और छोटे-छोटे हट तैयार किए गए हैं, जहां लोग प्रकृति के सान्निध्य में वक्त बिता सकते हैं।

आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश

मंथन कार्यक्रम के दौरान यह संकल्प लिया गया था कि राज्य के सभी आईएएस अधिकारी एक-एक पौधा लगाएंगे और ऐसी वाटिका विकसित करेंगे जो आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे सके। आज यह वाटिका उसी सोच का प्रतीक बन चुकी है। यहां पहुंचने वाले लोग हरियाली का आनंद लेने के साथ अपने जीवन में कम से कम एक पेड़ लगाने का संकल्प लेकर लौटते हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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