भरतपुर में गौरैया को बचाने की प्रेरक पहल, घर-घर बने नन्हे घोंसले और लौट आईं चहचहाती चिड़ियां राजस्थान 2 महीने पहले 44
भरतपुर में लोग गौरैया के संरक्षण के लिए अपने घरों, छतों और आंगनों में बर्ड हाउस लगा रहे हैं, जिससे इन नन्ही चिड़ियों को सुरक्षित ठिकाना मिल रहा है और पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है।

भरतपुर में इन दिनों गौरैया चिड़िया के संरक्षण को लेकर एक ऐसी पहल सामने आ रही है, जो दूसरों के लिए मिसाल बन रही है। गौरैया की लगातार घटती संख्या को देखते हुए यहां के स्थानीय निवासियों ने अपने घरों, छतों और आंगनों में इन नन्ही चिड़ियों के लिए छोटे-छोटे आशियाने यानी बर्ड हाउस तैयार करने शुरू कर दिए हैं।

अभियान का मकसद

इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य गौरैया को सुरक्षित घोंसला मुहैया कराना और उसके प्राकृतिक आवास को बचाए रखना है। पर्यावरण से जुड़े लोगों और सामाजिक संगठनों की ओर से चलाई जा रही जागरूकता गतिविधियों के चलते बड़ी तादाद में लोग इस अभियान का हिस्सा बन रहे हैं।

घटते आवास बड़ी चुनौती

गौरैया को पर्यावरण के संतुलन का एक अहम हिस्सा माना जाता है, लेकिन बढ़ते शहरीकरण और बदलती जीवनशैली के कारण इसके रहने के ठिकाने निरंतर सिमटते जा रहे हैं। ऐसे हालात में भरतपुर की यह कोशिश गौरैया के संरक्षण की दिशा में मददगार साबित हो रही है।

जागरूकता की ओर बढ़ता कदम

यह पहल सिर्फ गौरैया को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने लोगों के बीच पर्यावरण और जैव विविधता को लेकर भी जागरूकता बढ़ाने का काम किया है। नतीजतन, अब आंगनों और छतों पर एक बार फिर चहचहाती चिड़ियां लौटने लगी हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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