बागेश्वर के पोखरी गांव में रिंगाल से बन रहे इको फ्रेंडली डस्टबिन, प्लास्टिक को कहा अलविदा उत्तराखंड एक घंटा पहले 2
उत्तराखंड का पोखरी गांव अब प्लास्टिक और लोहे की जगह पहाड़ी रिंगाल से बनी टोकरियों को कूड़ेदान के रूप में अपना रहा है, जिससे स्थानीय शिल्प और पर्यावरण दोनों को बढ़ावा मिल रहा है।

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले का पोखरी गांव इन दिनों दोहरी पहचान बना रहा है। देश का पहला म्यूजिकल विलेज बनने के साथ-साथ यह गांव पर्यावरण संरक्षण की एक अनूठी मिसाल भी पेश कर रहा है। ग्रामीणों ने अपने गांव को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त और सुंदर बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल शुरू की है।

प्लास्टिक की जगह पारंपरिक रिंगाल

अब इस गांव की सड़कों और पगडंडियों पर प्लास्टिक या लोहे के डस्टबिन नजर नहीं आएंगे। इनकी जगह पहाड़ की पारंपरिक 'रिंगाल' से तैयार की गई टोकरियां कूड़ेदान के रूप में लगाई जा रही हैं। यह छोटा-सा बदलाव गांव की तस्वीर को बदल रहा है और स्वच्छता के प्रति लोगों की सोच को नई दिशा दे रहा है।

संस्कृति, रोजगार और पर्यावरण का संगम

यह पहल केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं है। रिंगाल से बनी टोकरियों का इस्तेमाल पहाड़ की पुरानी संस्कृति और शिल्प परंपरा को सहेजने में मदद कर रहा है। साथ ही इससे स्थानीय शिल्पकारों को रोजगार भी मिल रहा है, जिससे उनके पारंपरिक हुनर को नई पहचान मिल रही है।

पर्यावरण को सुरक्षित रखने और लोकल उत्पादों को बढ़ावा देने वाला यह कदम धीरे-धीरे एक बड़े मॉडल के रूप में उभर रहा है, जो दूसरे गांवों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!