सरहद के इस माड़साहब ने बदली धरती की रंगत, पहली तनख्वाह से बोई थी हरियाली की नींव राजस्थान एक महीने पहले 17
बाड़मेर के शिक्षक भैराराम भाखर बीते 26 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण को मिशन बनाकर जुटे हैं और अब तक करीब 4.65 लाख पौधे लगा चुके हैं। पहली सरकारी तनख्वाह से शुरू हुआ उनका यह सफर हर परिवार को प्रकृति से जोड़ने के संकल्प तक पहुंच गया है।

राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर के रहने वाले शिक्षक भैराराम भाखर पिछले 26 वर्षों से पर्यावरण की रक्षा को अपने जीवन का लक्ष्य बनाकर निरंतर सक्रिय हैं। हरियाली के प्रति उनके इसी समर्पण के कारण आसपास के लोग उन्हें स्नेह से "पौधों वाले माड़साहब" कहकर पुकारते हैं।

पहली तनख्वाह से शुरू हुआ हरियाली का सफर

जब उन्हें सरकारी नौकरी मिली, तो उन्होंने अपनी पहली पूरी तनख्वाह पौधे लगाने में लगा दी। यहीं से उनके जीवन में हरियाली फैलाने का वह सिलसिला शुरू हुआ, जो आज तक थमा नहीं है और लगातार आगे बढ़ रहा है।

लाखों पौधे और बीजों का योगदान

अपने इस लंबे अभियान के दौरान भैराराम भाखर अब तक करीब 4.65 लाख पौधे लगा चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने 13 लाख से अधिक देशज जाळ के बीज भी लोगों के बीच बांटे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने सहजन के डेढ़ लाख से अधिक बीज भी आम लोगों तक पहुंचाने का काम किया है।

हर परिवार को प्रकृति से जोड़ने का संकल्प

उनका मूल उद्देश्य केवल पौधे लगाना भर नहीं है, बल्कि हर परिवार को प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण की मुहिम से जोड़ना है। वे चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ियां भी हरियाली के इस महत्व को समझें और इस जिम्मेदारी को आगे बढ़ाएं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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