साइकिल की चेन से गढ़ा पटना का मिनी गोलघर, देखते ही फोन निकाल लेते हैं लोग बिहार एक घंटा पहले 2
पटना के जेपी गंगा पथ पर एक कलाकार ने पुरानी साइकिल-बाइक की चेन से गोलघर की हूबहू प्रतिकृति तैयार की है, जो अब राहगीरों और पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

बिहार की राजधानी पटना का जेपी गंगा पथ अब सिर्फ अपनी खूबसूरत सड़क और गंगा के मनोरम नजारों के लिए ही नहीं, बल्कि एक अनोखी कलाकृति के कारण भी चर्चा में है। सड़क किनारे बने पार्क में स्थापित एक मिनी गोलघर राहगीरों और पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। पहली नजर में देखने वाला इसे गोलघर का छोटा मॉडल समझ लेता है, लेकिन जब इसकी बनावट की हकीकत पता चलती है तो लोग हैरान रह जाते हैं। यही वजह है कि यहां पहुंचने वाले लोग इसके साथ तस्वीरें लेना नहीं भूलते।

न ईंट, न सीमेंट — कबाड़ की चेन से तैयार

इस कलाकृति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बनाने में एक भी ईंट या सीमेंट का इस्तेमाल नहीं हुआ है। कलाकार ने साइकिल और बाइक की पुरानी और बेकार हो चुकी चेन का उपयोग करते हुए पूरे गोलघर को आकार दिया है। कबाड़ में फेंक दी जाने वाली चेन को कला के जरिए नई पहचान देने का यह प्रयास लोगों को खूब भा रहा है। यह कलाकृति रचनात्मकता का तो उदाहरण है ही, साथ ही पर्यावरण संरक्षण और रिसाइकल का संदेश भी देती है।

बारीकी से गढ़ी गई गोलाकार आकृति

करीब चार से साढ़े चार फीट ऊंचे इस मिनी गोलघर को बेहद बारीकी से तैयार किया गया है। चेन की कड़ियों को एक के ऊपर एक चिपकाकर और सजाकर गोलाकार आकृति बनाई गई है। दूर से देखने पर यह मॉडल पूरी तरह पटना के ऐतिहासिक गोलघर जैसा दिखाई देता है। इसकी बनावट में इतनी सफाई और संतुलन है कि लोग कुछ देर तक इसे नजदीक से निहारते हुए समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर इसे बनाया कैसे गया।

घुमावदार सीढ़ियां और गेट भी हूबहू

कलाकार ने खुद को सिर्फ गोल आकार तक सीमित नहीं रखा। असली गोलघर की पहचान मानी जाने वाली घुमावदार सीढ़ियों को भी इस मॉडल में शामिल किया गया है। इतना ही नहीं, असली गोलघर में जितने गेट हैं, उतने ही गेट इस प्रतिकृति में भी बनाए गए हैं। ऊपर से देखने पर यह मॉडल और भी आकर्षक नजर आता है और इसमें असली गोलघर की झलक साफ दिखाई देती है।

सेल्फी और सोशल मीडिया का नया अड्डा

यह अनोखी कलाकृति जेपी गंगा पथ पर गांधी मैदान वाले कट के पास सड़क किनारे बने पार्क में स्थापित है। हाल के दिनों में यह जगह युवाओं, परिवारों और पर्यटकों के बीच लोकप्रिय होती जा रही है। कई लोग यहां सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि इस अनोखे गोलघर और आसपास के पार्क को देखने तथा इसके साथ सेल्फी लेने भी पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इसकी तस्वीरें खूब साझा की जा रही हैं। इसे देखते ही लोग फोटो खींचने और सेल्फी लेने के लिए अपना फोन निकाल लेते हैं।

मुफ्त में दीदार, साथ में रिसाइकलिंग का संदेश

टॉप एंगल से देखने पर भी यह बिल्कुल असली गोलघर जैसा नजर आता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसे देखने के लिए लोगों को कोई शुल्क नहीं देना पड़ता। पार्क में आने वाला कोई भी व्यक्ति मुफ्त में इस मिनी गोलघर को देख सकता है, तस्वीरें ले सकता है और इसके साथ समय बिता सकता है। कबाड़ से बना यह गोलघर चीजों के रिसाइकलिंग की प्रक्रिया का भी संदेश देता है और बताता है कि बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं को भी आकर्षण का केंद्र बनाया जा सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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