उपनाम: प्रेरणादायक कहानी
सरहद के इस माड़साहब ने बदली धरती की रंगत, पहली तनख्वाह से बोई थी हरियाली की नींव
बाड़मेर के शिक्षक भैराराम भाखर बीते 26 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण को मिशन बनाकर जुटे हैं और अब तक करीब 4.65 लाख पौधे लगा चुके हैं। पहली सरकारी तनख्वाह से शुरू हुआ उनका यह सफर हर परिवार को प्रकृति से जोड़ने के संकल्प तक पहुंच गया है।
सिलाई से सींचे सपने, गोल्ड लोन से जुटाई फीस: संघर्ष के बीच जिगर बना गांव का पहला IITian
ओडिशा के गंजम जिले के एक छोटे से गांव के जिगर नायक ने जेईई-एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 5474 हासिल कर आईआईटी का सपना पूरा किया है। पिता के निधन के बाद मां ने सिलाई का काम कर उसकी पढ़ाई का खर्च उठाया।
न पेट्रोल का खर्च, न थकान की शिकायत: वन अधिकारी केसी मीना ने साइकिल को बनाया मिशन, हर जुबां पर 'साइकिलमैन'
57 वर्षीय वन विभाग के अधिकारी केसी मीना ड्यूटी के दौरान भी साइकिल से एक जिले से दूसरे जिले तक का सफर तय करते हैं। फिटनेस के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाले इस अधिकारी को आज हर कोई 'साइकिलमैन' के नाम से जानता है।
मौज-मस्ती की उम्र में मिसाल बनी अंशिका, गरीब बच्चों को मुफ्त पढ़ातीं और पॉकेट मनी से खरीदतीं कॉपी-पेंसिल
जमशेदपुर की ग्रेजुएशन छात्रा अंशिका हर दिन 20 से 25 गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देती हैं और अपनी पॉकेट मनी बचाकर उनके लिए पढ़ाई का सामान भी खरीदती हैं।
मां की मजदूरी और बेटी का जज्बा: मिट्टी के घर से अंतरराष्ट्रीय मैदान तक दिव्यानी लिंडा का सफर
रांची के माझी परखर स्थित चरदी गांव की दिव्यानी लिंडा भारतीय अंडर-17 महिला फुटबॉल टीम की सदस्य हैं। मिट्टी के घर में बीते कठिन बचपन से निकलकर उन्होंने अपने खेल के बल पर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है।
पिता को कैंसर ने छीना, मां ने सिलाई से पाला... अब गांव का पहला IITian बनने जा रहा जिगर
ओडिशा के गंजम जिले के एक छोटे से गांव के जिगर नायक ने JEE Advanced 2026 में AIR 17783 हासिल की है। पिता को खोने के बाद मां के संघर्ष के दम पर अब वह अपने गांव का पहला आईआईटीयन बनने की दहलीज पर है।
पिता के साथ फुटपाथ पर बेची सब्जी, बमुश्किल जुटाई स्कूल की फीस, आज विदेश में सीए बनकर कमा रहे लाखों
मुंबई के विक्रोली की तंग गलियों में पले-बढ़े अभिषेक वैश्य सुबह तीन बजे पिता के साथ सब्जी बेचा करते थे। आज वही युवा चार्टर्ड अकाउंटेंट बनकर ओमान और यूएई में अपनी फर्म चला रहे हैं।
नौकरी छोड़कर शुरू किया कारोबार, झेलीं तमाम मुश्किलें, फिर भी डटे रहे ग्रेटर नोएडा के अमित उपाध्याय
ग्रेटर नोएडा के उद्यमी अमित उपाध्याय ने नौकरी छोड़कर कारोबार की राह चुनी और कैंसिल ऑर्डर, कर्ज व आर्थिक संकट से जूझते हुए आज सालाना 5 से 7 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंच गए हैं।
श्मशान घाट की पाठशाला से निकलीं दो बेटियां, वुशू में जीता गोल्ड मेडल
मुजफ्फरपुर के श्मशान घाट परिसर में चलने वाली पाठशाला की दो बच्चियों ने राज्य स्तरीय वुशू चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जगह बनाई है। आर्थिक तंगी के बीच इन बेटियों की सफलता पूरे जिले के लिए प्रेरणा बन गई है।
कैंसर ने छीना पिता का साया, मां ने सिलाई कर पढ़ाया, अब जिगर बनेगा गांव का पहला IITian
ओडिशा के एक छोटे से गांव के जिगर नायक ने जेईई-एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 17783 हासिल की है। पिता को कैंसर में खोने के बाद उनकी मां ने टेलरिंग कर बेटे का सपना पूरा किया।
राजस्थान: न शादी, न अपना परिवार... फिर भी इस शख्स को 60 हजार 'बच्चे' कहते हैं पिता, वजह कर देगी हैरान
राजस्थान के एक व्यक्ति को हजारों जरूरतमंद बच्चे अपना अभिभावक मानते हैं। बिना किसी जैविक रिश्ते के उसके करीब 60 हजार 'बच्चे' हैं, और इसके पीछे की वजह बेहद प्रेरणादायक है।
11वीं में फेल होने पर उड़ता था मजाक, मेहनत ने पलटी किस्मत और बन गए सऊदी कंपनी के डायरेक्टर
बुरहानपुर के जगदीश कुमार शाह 11वीं में फेल होने के बाद तानों के बावजूद नहीं रुके और आज सऊदी अरब की एक बड़ी कंपनी में डायरेक्टर हैं, जहां उनके नेतृत्व में 200 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं।
एक-दो बार नहीं, 12 बार मिली नाकामी; 13वीं कोशिश में बिहार पुलिस में चयन — भोजपुर के गोलू की प्रेरक कहानी
भोजपुर के बेहरा गांव के अभिषेक उर्फ गोलू ने लगातार 12 असफलताओं के बाद 13वें प्रयास में बिहार पुलिस सिपाही भर्ती में सफलता हासिल की। आर्थिक तंगी और कोचिंग के अभाव में उन्होंने सेल्फ स्टडी के दम पर यह मुकाम पाया।
बिहार का वह बेटा जिसने IAS बनने के बाद दो बार माउंट एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा
उत्तर प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी रविंद्र कुमार ने प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ पर्वतारोहण और जल संरक्षण में भी अलग पहचान बनाई है। दो बार एवरेस्ट पर तिरंगा लहराने वाले इस अधिकारी को अब देश के 25 सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारियों की सूची में शामिल किया गया है।
हौसले की मिसाल: 15 साल के गर्वित ने एक दिन के लिए संभाली जिला कलेक्टर की कुर्सी, भावुक हुआ माहौल
डीडवाना में जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल से डीएमडी जैसी लाइलाज बीमारी से जूझ रहे 15 वर्षीय गर्वित रेवाड़ को एक दिन के लिए जिला कलेक्टर बनने का मौका मिला। उनकी संघर्षपूर्ण कहानी आज हजारों युवाओं की प्रेरणा बन रही है।