बुरहानपुर के भाई-बहन की मिसाल: पढ़ाई के साथ शुरू किया ऑर्गेनिक जूस का स्टार्टअप, सोशल मीडिया से मिली प्रेरणा व्यापार 2 महीने पहले 74
बुरहानपुर में दो भाई-बहन अपनी कॉलेज की पढ़ाई के साथ ऑर्गेनिक जूस का स्टॉल चलाकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। मात्र 5000 रुपये की शुरुआती पूंजी से शुरू हुआ यह काम अब लोगों की पहली पसंद बन गया है।

सोशल मीडिया से मिला बिजनेस का आइडिया

आजकल के युवा न केवल अपनी शिक्षा पर ध्यान दे रहे हैं, बल्कि छोटे स्तर पर स्टार्टअप शुरू कर अपना भविष्य भी खुद संवार रहे हैं। बुरहानपुर के सरस्वती नगर में रहने वाले भाई-बहन की मेहनत और लगन इसका जीता-जागता उदाहरण है। कॉलेज में बीपीटी की पढ़ाई कर रहे इन भाई-बहनों को सोशल मीडिया के जरिए ऑर्गेनिक जूस स्टॉल का आइडिया मिला, जिसके बाद उन्होंने इसे हकीकत में बदलने का फैसला किया।

5000 रुपये से की शुरुआत

कृष्ण वाघ और उनकी बहन सिद्धि वाघ ने मात्र 5000 रुपये की पूंजी निवेश करके अपने काम की शुरुआत की। इस कार्य में उनकी कजिन बहन लतिका भी उनका पूरा साथ देती हैं। शुरुआत में उन्होंने अपना पहला स्टॉल मरीचिका गार्डन के पास लगाया था। जब उन्हें वहां सफलता मिली और लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला, तो उन्होंने अपने काम का विस्तार करते हुए नेहरू स्टेडियम के पास दूसरा स्टॉल शुरू किया।

रोजाना की कमाई और खास जूस की वैरायटी

यह स्टार्टअप अपनी गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। यहां किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है और पूरी तरह से ऑर्गेनिक फल व सब्जियों का उपयोग किया जाता है। इनकी कुछ मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • सुबह 6:00 से 9:00 बजे के बीच स्टॉल का संचालन होता है।
  • ग्राहकों को 12 तरह के अलग-अलग जूस उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • जूस के विकल्पों में करेला, लौकी, मेथी, गाजर, मिलेट्स, नींबू पानी, जामुन, चीकू, मौसमी और सेब का जूस शामिल है।
  • जूस की कीमत 30 से 40 रुपये प्रति गिलास रखी गई है।
  • इस काम से वे प्रतिदिन 500 से 1000 रुपये तक की कमाई कर रहे हैं।

स्थानीय लोग इनके बिना केमिकल वाले ताजे जूस को काफी पसंद कर रहे हैं। अपनी पढ़ाई के साथ-साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने की यह कोशिश युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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