मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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विचारों
कहा जाता है कि जब कोई इंसान पूरी शिद्दत के साथ किसी लक्ष्य के पीछे लग जाता है, तो पूरी कायनात उसे पाने में उसकी मदद करने लगती है। ऐसी ही मिसाल पेश की है 19 साल के ओवैस मंसूरी ने, जिन्होंने चार साल की कड़ी मेहनत के बूते IIT मुंबई में अपनी जगह पक्की कर ली है। खास बात यह रही कि पिछले साल चयन हो जाने के बाद भी उन्होंने अपने मनपसंद संस्थान के लिए पढ़ाई से एक साल का ड्रॉप लिया और दूसरे ही प्रयास में जेईई मेंस में 1856 रैंक लाकर अपना सपना पूरा किया।
उमरिया का बेटा, सागर में मना जश्न
ओवैस मंसूरी मूल रूप से उमरिया जिले के रहने वाले हैं। सागर के दयानंद वार्ड निवासी अब्दुल रशीद दलेल खा के यहां उनका ननिहाल है। इस सफलता के बाद ओवैस अपने पिता मोहम्मद सलीम, मां शाहीन बेगम और बहन के साथ ननिहाल सागर पहुंचे, जहां उन्होंने अपने नाना, नानी, मामा और बहनों के साथ मिलकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया। चयन की खबर के बाद से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।
पिता से मिली इंजीनियरिंग की प्रेरणा
ओवैस बताते हैं कि उनके पिता मोहम्मद सलीम नगरीय प्रशासन विभाग में सिविल इंजीनियर हैं। उन्हीं को देखकर उनके मन में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा जगी। आठवीं कक्षा में ही उन्होंने तय कर लिया था कि वह इंजीनियर बनेंगे और IIT मुंबई से ही पढ़ाई करेंगे। इसी सपने को साकार करने के लिए वह दसवीं से ही कोटा चले गए और वहीं रहकर बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की। ग्यारहवीं और बारहवीं के दौरान वह लगातार इसकी तैयारी में जुटे रहे।
एक साल का ड्रॉप और रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई
पिछले साल भी ओवैस ने जेईई मेंस की परीक्षा दी थी, जिसमें ओबीसी कैटेगरी से उनकी 3800 रैंक आई थी। इस रैंक पर उन्हें मुंबई IIT को छोड़कर दूसरे संस्थानों में आसानी से दाखिला मिल रहा था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार करने के बजाय पढ़ाई से गैप लेने का फैसला किया और इंदौर जाकर सेल्फ स्टडी के दम पर तैयारी शुरू कर दी।
एक साल तक उन्होंने पूरी लगन से मेहनत की। इस दौरान वह रोजाना सुबह 5:00 बजे उठते और रात 11:00 बजे सोते थे। औसतन वह 8 से 10 घंटे तक पढ़ाई करते थे और सोशल मीडिया का इस्तेमाल बहुत कम करते थे। जब तक ओवैस कोटा में रहकर पढ़ाई करते रहे, उनकी मां उनके साथ रहीं। उनके पिता उस समय रतलाम के आलोट में पदस्थ थे और शनिवार-रविवार को ही परिवार से मिलने आ पाते थे।
ओवैस की सीख छात्रों के लिए
ओवैस का मानना है कि जो विद्यार्थी इस तरह के बड़े संस्थानों में जाने का सपना देखते हैं, उन्हें ग्यारहवीं और बारहवीं से ही तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। उनके मुताबिक अगर किसी को कोटा या किसी बड़े संस्थान में पढ़ने का अवसर मिले, तो उसे जरूर चुनना चाहिए।
वह कहते हैं कि किसी भी विषय को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तीनों मुख्य विषयों को बराबर समय देना चाहिए। अपना उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उनकी केमिस्ट्री कमजोर थी, लेकिन मैथ्स मजबूत होने के कारण वह दोनों के बीच संतुलन बना लेते थे।
IIT मुंबई ही क्यों चुना
ओवैस बताते हैं कि IIT मुंबई को चुनने के पीछे उनकी सोच साफ थी। उनके अनुसार यह भारत का सबसे बेहतरीन इंजीनियरिंग संस्थान है और साथ ही मुंबई जैसा शहर भी बहुत अच्छा है, जहां पढ़ाई के साथ-साथ बेहतरीन एक्सपोजर मिलेगा।
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