इस गांव को कहते हैं 'फौजियों की फैक्ट्री', खुद वर्दी न पहन सके युवक ने तैयार कर दिए दर्जनों जवान मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 2
बुरहानपुर के शाहपुर का एक युवक हाइट की वजह से खुद फौज में भर्ती नहीं हो सका, लेकिन हार न मानते हुए उसने एकेडमी खोलकर 7 साल में 37 बच्चों को सेना और पुलिस में भर्ती करा दिया।

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर बसे शाहपुर गांव की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो हौसले और जुनून की मिसाल बन गई है। यहां के एक युवक के दिल में बचपन से ही देश की सेवा करने का जोश, जज्बा और जुनून भरा हुआ था। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह बड़ा होता गया और फौजी बनकर वतन की रक्षा करने का सपना संजोता रहा।

सात बार कोशिश, फिर भी नहीं मिली कामयाबी

अपने इस सपने को सच करने के लिए युवक ने पूरे सात बार प्रयास किया, लेकिन हर बार उसके हाथ निराशा ही लगी। बार-बार असफल होने के बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने ठान लिया कि अगर वह खुद वर्दी नहीं पहन सका, तो दूसरों को इस काबिल जरूर बनाएगा। इसी सोच के साथ उसने एक एकेडमी की शुरुआत कर दी।

7 साल से दे रहे निशुल्क ट्रेनिंग

पिछले 7 साल से यह युवक गांव और शहर के बच्चों को आर्मी और पुलिस का जवान बनने की निशुल्क ट्रेनिंग दे रहा है। अब तक वह अपनी अकादमी के जरिए 37 बच्चों को आर्मी और पुलिस में भर्ती करा चुका है। आज ये सभी जवान देश की सेनाओं में रहते हुए भारत माता की रक्षा कर रहे हैं।

हाइट के कारण नहीं हुआ चयन

जब लोकल टीम ने युवक राहुल शिवलकर से बातचीत की, तो उन्होंने अपने सफर के बारे में खुलकर बताया।

बचपन से ही देश की सेवा करने का जोश और जज्बा था। इसीलिए मैंने सात बार प्रयास किया, लेकिन हाइट के कारण मेरा फौज में सिलेक्शन नहीं हो पाया। मैंने हिम्मत नहीं हारी और एक एकेडमी शुरू कर दी। इस एकेडमी में 7 साल से गांव और शहर के बच्चों को फौजी और पुलिस की ट्रेनिंग देता हूं। 7 साल में 37 बच्चों का सिलेक्शन हुआ है और आज वे देश की बॉर्डर पर तैनात हैं।

मामा से मिली प्रेरणा

राहुल ने बताया कि उनके पिता लक्ष्मण चिवलकर पंचर की दुकान चलाते हैं, जबकि माता निर्मला गृहिणी हैं। उन्हें यह राह दिखाने का काम उनके मामा ने किया, जो खुद फौजी हैं। राहुल कहते हैं कि भले ही वह खुद फौजी नहीं बन सके, लेकिन उन्होंने देश के लिए 37 जवान खड़े कर दिए। यही वजह है कि शाहपुर गांव को आज 'फौजियों की फैक्ट्री' के नाम से जाना जाता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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