उपनाम: प्रेरणादायक कहानी
4 फीट कद, मगर हौसले आसमान पर: जहानाबाद के राम टहल मूंगफली बेचकर कमा रहे हैं सम्मानजनक आजीविका
जहानाबाद के रहने वाले राम टहल राम ने अपनी कम लंबाई को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। मात्र 4 फीट की ऊंचाई के बावजूद वे और उनका परिवार रोजाना मूंगफली बेचकर 800 से 1000 रुपये तक की कमाई कर रहे हैं और स्वाभिमान के साथ जीवन जी रहे हैं।
सफलता की कहानी: ₹2,000 की पहली कमाई से शुरू किया करियर, आज ₹2 करोड़ की कंपनी के मालिक हैं अभिनंदन
जहानाबाद के अभिनंदन कुमार ने बेहद गरीबी के दौर से निकलकर रियल एस्टेट क्षेत्र में अपनी जगह बनाई है। ₹2,000 के पहले मुनाफे से शुरू हुआ उनका सफर आज एक सफल कंपनी तक पहुंच गया है, जिसका टर्नओवर करोड़ों में है।
मुजफ्फरपुर में बेटियों ने पेश की मिसाल: भारी विरोध के बावजूद तीन बहनों ने दिया पिता की अर्थी को कंधा, सबसे छोटी बेटी ने दी मुखाग्नि
बिहार के मुजफ्फरपुर में बेटा न होने पर तीन बेटियों ने पुरानी सामाजिक परंपराओं को तोड़ते हुए न केवल अपने दिवंगत पिता की अर्थी को कंधा दिया, बल्कि विरोधियों का सामना करते हुए अंतिम संस्कार भी संपन्न कराया।
पति के दारोगा होने के बावजूद रेखा देवी ने चुना सेवा का मार्ग, जहानाबाद में पिछले 25 वर्षों से महिलाओं को दे रहीं मुफ्त सिलाई प्रशिक्षण
जहानाबाद की 52 वर्षीय रेखा देवी बीते 25 सालों से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुफ्त सिलाई सिखा रही हैं। पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) पति की पत्नी होने के बावजूद वे समाज सेवा के इस अनोखे मिशन में जुटी हुई हैं।
सड़क किनारे स्टॉल लगाकर सजावटी कला को दे रहीं नई पहचान, सरगुजा की इन दो बहनों का जज्बा है मिसाल
छत्तीसगढ़ के सरगुजा में दो बहनों, मृगाक्षी और मृणाली ने आर्थिक मजबूरी के बजाय अपने शौक को करियर में बदलने के लिए लियानबी नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया है। वे सड़क किनारे स्टॉल लगाकर मोजेक और लिप्पन आर्ट जैसी कलाकृतियां बेच रही हैं और अन्य युवाओं को प्रेरि...
नवादा के विपुल ने रचा इतिहास, किराना दुकानदार के बेटे ने सीए बनकर इलाके का बढ़ाया मान
नवादा जिले के काशीचक प्रखंड के रहने वाले विपुल कुमार ने कठिन सीए परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने क्षेत्र के पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का गौरव हासिल किया है।
NEET UG का कमाल: बिहार के सहरसा में किराना दुकानदार के तीन बच्चों ने एक साथ पास की परीक्षा
बिहार के सहरसा जिले में एक किराने की दुकान चलाने वाले पिता के तीन बच्चों ने संसाधनों की कमी के बावजूद NEET UG परीक्षा पास कर एक बड़ी मिसाल कायम की है।
नीट में लगातार 5 बार मिली असफलता, फिर कैसे बदली प्रणव की किस्मत? बिहार के इस छात्र ने पेश की मिसाल
बिहार के पूर्णिया निवासी प्रणव ने लगातार 5 बार नीट परीक्षा में असफल होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और छठी बार में सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाकर अपना सपना पूरा किया। उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा उन सभी छात्रों के लिए एक बड़ा सबक है जो कड़ी मेहनत और दृ...
जहानाबाद की सुमन देवी: घर की दहलीज लांघकर सिलाई से संवारी अपनी तकदीर
जहानाबाद की रहने वाली सुमन देवी ने घर के काम तक सीमित रहने वाली अपनी दिनचर्या को बदल दिया है। शिक्षित होने के नाते उन्होंने सिलाई के हुनर को अपनाकर न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि आत्मनिर्भर भी बनी हैं।
दो बच्चों की मां ने लिखी सफलता की इबारत, शादी के 9 साल बाद बनीं BTSC फार्मासिस्ट
मुजफ्फरपुर की प्रीति कुमारी ने घरेलू जिम्मेदारियों और नौकरी के साथ तालमेल बिठाकर पहले प्रयास में सरकारी नौकरी हासिल कर मिसाल पेश की है।
कांगड़ा की अनूठी पहल: पति के निधन के बाद सास-ससुर ने बेटी की तरह किया बहू का कन्यादान
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में एक सास-ससुर ने समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने बेटे की मृत्यु के बाद विधवा बहू की दूसरी शादी करवाकर उसे बेटी की तरह विदा किया।
10वीं में मिले थे सिर्फ 44% नंबर, लगातार 10 बार परीक्षा में हुए फेल, जानिए कैसे आईएएस अवनीश शरण ने हासिल किया यह मुकाम और 45 की उम्र में बदली अपनी काया
10वीं में कम अंक लाने और दर्जनों परीक्षाओं में असफल होने के बावजूद अवनीश शरण ने हार नहीं मानी और आईएएस अधिकारी बने। अब 45 साल की उम्र में उन्होंने अपनी फिटनेस से सबको चौंका दिया है।
मजदूरी से मैराथन तक: 7 साल की उम्र में अनाथ हुए मनीष की कहानी, अब स्पीति में 77 किमी की दौड़ के लिए तैयार
भोजपुर के रहने वाले मनीष कुमार ने बेहद कम उम्र में माता-पिता को खोने के बाद मजदूरी करके अपना जीवन गुजारा, लेकिन हार नहीं मानी। अब वह संघर्षों को पीछे छोड़ हिमाचल प्रदेश की कठिन 77 किलोमीटर लंबी अल्ट्रा मैराथन में हिस्सा लेने जा रहे हैं।
बिहार का बागमझौवा: एक ऐसा गांव जहां हर घर से निकलते हैं पुलिस अधिकारी, जानें इसकी कहानी
भोजपुर जिले का बागमझौवा गांव अपनी अनोखी पहचान के चलते 'दरोगा वाला गांव' के नाम से विख्यात है, जहां से बड़ी संख्या में युवा पुलिस सेवा और प्रशासनिक पदों पर कार्यरत हैं।
शादी के 7 महीने बाद ही आरा की शिवांगिनी बनीं अफसर, पहले प्रयास की विफलता को दूसरे में बदला कामयाबी में
भोजपुर जिले के आरा की शिवांगिनी सिंह ने 70वीं BPSC परीक्षा में सफलता का परचम लहराते हुए ग्रामीण विकास पदाधिकारी का पद हासिल किया है। शादी के महज सात महीने के भीतर मिली इस उपलब्धि ने उनके मायके और ससुराल, दोनों परिवारों का मान बढ़ा दिया है।