8 हजार रुपये से शुरू किया फलों का काम, 20 साल की कड़ी मेहनत से बदली पूरन राठौर की किस्मत व्यापार एक घंटा पहले 5
मध्य प्रदेश के शिवपुरी में रहने वाले पूरन राठौर और उनकी पत्नी ने बेहद कम पूंजी से अपना सफर शुरू किया और दो दशक की ईमानदारी भरी मेहनत से आज अपने पूरे परिवार का सहारा बन गए हैं।

सफलता की एक प्रेरणादायक कहानी

सफलता पाने के लिए जरूरी नहीं कि हमेशा बड़े निवेश या भव्य ऑफिस की जरूरत हो। अक्सर छोटे से कदम और अटूट मेहनत ही जीवन की दिशा बदल देते हैं। मध्य प्रदेश के शिवपुरी शहर में फल बेचने वाले पूरन राठौर और उनकी पत्नी उदय राठौर इसी बात का एक जीता-जागता उदाहरण हैं। करीब 20 साल पहले, महज 8 हजार रुपये की छोटी सी पूंजी से शुरू हुआ उनका काम आज उनके पूरे परिवार का भरण-पोषण करने का मुख्य जरिया बन चुका है।

सुबह 5 बजे से शुरू होती है दिनचर्या

पूरन राठौर की मेहनत की कहानी सुबह के 5 बजे से ही शुरू हो जाती है। वे रोजाना इतनी जल्दी उठकर मंडी जाते हैं, ताकि वे मौसम के अनुरूप सबसे ताजे और अच्छे फल चुन सकें। ताजे फलों को खरीदने के बाद उन्हें अपने हाथ ठेले पर करीने से सजाया जाता है। इसके बाद, उनका दिन पोहरी बस स्टैंड के पास फल का ठेला लगाकर शुरू होता है। सुबह से लेकर देर शाम तक यह दम्पति पूरी निष्ठा के साथ ग्राहकों को फल उपलब्ध कराने में जुटा रहता है।

जीवनसंगिनी का मिला साथ

पूरन राठौर अपने इस संघर्षपूर्ण सफर में अपनी पत्नी उदय राठौर को सबसे बड़ा संबल मानते हैं। उनका कहना है कि इस छोटे से कारोबार की सफलता के पीछे उनकी पत्नी का बड़ा हाथ है। उदय राठौर ठेले पर फलों को सजाने से लेकर, ग्राहकों को फल तौल कर देने और आर्थिक हिसाब-किताब रखने तक के काम में हर कदम पर अपने पति का साथ देती हैं। इस दम्पति की साझा मेहनत का ही परिणाम है कि उनका यह काम निरंतर आगे बढ़ रहा है और उनके परिवार की जरूरतें पूरी हो रही हैं।

सात सदस्यों के परिवार का सहारा

आज इस फल के ठेले से सात सदस्यों का परिवार जुड़ा हुआ है। परिवार में पूरन राठौर, उनकी पत्नी, उनकी माताजी, तीन बेटे और एक बेटी शामिल हैं। पूरन बताते हैं कि बच्चों की शिक्षा से लेकर घर के अन्य खर्चों और रोजाना की जरूरतें इसी कमाई से पूरी की जाती हैं। हालांकि शुरुआत में आमदनी सीमित थी, लेकिन समय के साथ मेहनत रंग लाई और आज उनका यह कारोबार वार्षिक आधार पर लाखों रुपये तक के स्तर पर पहुंच चुका है।

ईमानदारी और विश्वास की पूंजी

दो दशक लंबे इस सफर में पूरन राठौर ने कभी भी फलों की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया। वे उचित दाम और ताजे फलों की उपलब्धता पर हमेशा जोर देते हैं, जिसकी वजह से स्थानीय निवासियों के बीच उनका भरोसा काफी मजबूत हुआ है। उनके कई ग्राहक ऐसे हैं जो पिछले 20 साल से लगातार उन्हीं के ठेले से फल खरीद रहे हैं। पूरन के अनुसार, उनका कड़ा परिश्रम, ईमानदारी और ग्राहकों का अटूट विश्वास ही उनकी असली और सबसे बड़ी जमापूंजी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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