साइकिल मिस्त्री की बेटी बनी अफसर, बिना कोचिंग पहले प्रयास में बीपीएससी परीक्षा में पाई सफलता करियर 2 घंटे पहले 3
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ की रहने वाली दीक्षा सोनी ने बिना किसी कोचिंग के सेल्फ स्टडी के दम पर बीपीएससी परीक्षा पास कर मिसाल कायम की है। दीक्षा ने अपने पहले ही प्रयास में सप्लाई इंस्पेक्टर का पद हासिल किया है।

संघर्ष और सफलता की नई कहानी

प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश की रहने वाली दीक्षा सोनी ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से सफलता की एक ऐसी इबारत लिखी है, जो हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली दीक्षा के पिता साइकिल मरम्मत का काम करते हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद दीक्षा ने अपनी शिक्षा और सपनों को कभी कम नहीं होने दिया। उन्होंने बिना किसी कोचिंग संस्थान की मदद लिए, घर पर रहकर ही अपनी तैयारी की और अपने पहले ही प्रयास में बीपीएससी परीक्षा में सफलता का परचम लहराया है। वह अब सप्लाई इंस्पेक्टर के पद पर अपनी सेवाएं देंगी।

सफलता का सफर: यूपीएससी से बीपीएससी तक

दीक्षा ने बताया कि 70वीं बीपीएससी परीक्षा उनका पहला प्रयास था। हालांकि, वह इस मुकाम तक रातों-रात नहीं पहुंची हैं। इससे पहले उन्होंने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा के लिए तीन बार प्रयास किए थे। अपने सफर के दौरान, वह दो बार यूपीएससी की मुख्य परीक्षा में शामिल हुईं और एक बार इंटरव्यू के चरण तक भी पहुंची थीं। इतना ही नहीं, उन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की तीन मुख्य परीक्षाओं का सामना किया है और एक बार वहां भी इंटरव्यू तक का सफर तय किया था। लगातार मिल रही असफलताओं के बावजूद, दीक्षा ने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी जारी रखी। अंततः, 70वीं बीपीएससी के पहले ही प्रयास में उन्हें सप्लाई इंस्पेक्टर का महत्वपूर्ण पद प्राप्त हुआ।

कोचिंग के बिना सेल्फ स्टडी का रास्ता

दीक्षा की सफलता का सबसे बड़ा आधार उनकी 'सेल्फ स्टडी' रही है। उन्होंने किसी भी महंगे कोचिंग संस्थान में जाकर पढ़ाई करने के बजाय लखनऊ में रहकर अपने कमरे में खुद से तैयारी की। आज के दौर में इंटरनेट और यूट्यूब जैसे माध्यमों का सही इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है, यह दीक्षा के अनुभव से सीखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि कोचिंग की भारी-भरकम फीस भरना उनके पिता की आर्थिक स्थिति के हिसाब से संभव नहीं था। इसलिए उन्होंने स्वयं ही इंटरनेट से अध्ययन सामग्री जुटाई और उसी के आधार पर अपनी रणनीति तैयार की।

पिता का विश्वास और बेटी का समर्पण

दीक्षा का परिवार पांच बहनों का है, जिनमें वह चौथे नंबर पर आती हैं। उनके पिता ने अपनी सीमित आमदनी से बेटियों की परवरिश की और हमेशा उनकी शिक्षा को प्राथमिकता दी। दीक्षा के शिक्षकों के सुझाव पर ही उनके पिता ने उन्हें बाहर रहकर पढ़ने के लिए भेजा था। दिलचस्प बात यह है कि पिता को यह तो पता था कि उनकी बेटी लखनऊ में रहकर सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही है, लेकिन वह यह नहीं जानते थे कि वह इतनी बड़ी परीक्षा की तैयारी में जुटी है। जब दीक्षा के पास नियुक्ति पत्र पहुंचा, तब जाकर उनके पिता को इस गौरवशाली उपलब्धि का पता चला। पिता के लिए यह एक बहुत बड़ा और सुखद सरप्राइज था।

सीमित संसाधन और मजबूत इच्छाशक्ति

दीक्षा का मानना है कि सफलता के लिए सिर्फ संसाधन ही जरूरी नहीं होते, बल्कि आपकी इच्छाशक्ति और खुद पर भरोसा सबसे अधिक मायने रखता है। उन्होंने कहा कि यदि मन में लक्ष्य को पाने की जिद हो, तो सीमित साधन भी बाधा नहीं बनते। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता के अटूट भरोसे और खुद के निरंतर धैर्य को दिया है। पांच बहनों के परिवार से निकलकर एक अधिकारी बनने तक का सफर काफी चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन दीक्षा ने हर बाधा का डटकर सामना किया।

प्रतियोगी छात्रों के लिए सीख

परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए दीक्षा ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने बताया कि सबसे पहले टॉपर्स के वीडियो और उनके अनुभव को देखना चाहिए ताकि परीक्षा के पाठ्यक्रम और तैयारी की रणनीति को सही ढंग से समझा जा सके। इसके बाद लगातार मेहनत करना सबसे आवश्यक है। दीक्षा ने स्वीकार किया कि तैयारी के दौरान कई बार निराशा का माहौल भी बनता है, लेकिन उस निराशा को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। निरंतरता और आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी है, जो आपको अपनी मंजिल तक पहुँचाती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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