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3 घंटे पहले
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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने हाल ही में राज्य के पुलिस महकमे में एक बड़ा फेरबदल किया है। 20 अगस्त 2026 को शासन द्वारा जारी की गई तबादला सूची के तहत 23 IPS अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं। इस प्रशासनिक फेरबदल की सूची में साल 2024 बैच की होनहार IPS अधिकारी सारिका चौधरी का नाम भी शामिल है। पूर्व में सहायक पुलिस आयुक्त के पद पर कार्यरत सारिका चौधरी को अब सहारनपुर का नया ASP नियुक्त किया गया है। वर्दी का यह गौरवपूर्ण सफर सारिका के लिए कतई आसान नहीं था। इसके पीछे अटूट दृढ़ संकल्प, कड़े संघर्ष और बार-बार मिलने वाली असफलताओं से पार पाने की एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी है, जो देश के लाखों युवाओं को हिम्मत दे सकती है।
शैक्षणिक सफर: बिट्स पिलानी और JNU को छोड़ सिविल सेवा की ओर बढ़ाया कदम
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के अंतर्गत आने वाले पिलानी की रहने वाली सारिका चौधरी का जन्म 1 जनवरी 1994 को हुआ था। उनके परिवार में शिक्षा का माहौल शुरू से ही रहा है। उनके पिता मुकेश चौधरी तहसीलदार के पद पर कार्यरत रहे हैं, जबकि उनकी मां सुमन चौधरी एक सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल के रूप में अपनी सेवाएं दे रही थीं। सारिका बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में बेहद तेज थीं। अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान 12वीं कक्षा में उन्होंने बेहतरीन अंकों के साथ टॉप किया था। इसके बाद उनका चयन प्रतिष्ठित संस्थान बिट्स पिलानी में हो गया, जहां वे इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर सकती थीं।
हालांकि, सारिका की मंजिल कुछ और ही थी। उन्होंने इंजीनियरिंग की राह छोड़ दी और दिल्ली का रुख किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध हिंदू कॉलेज से उन्होंने ग्रेजुएशन और फिर मास्टर्स की डिग्री हासिल की। इस दौरान भी उनका शानदार प्रदर्शन जारी रहा और वे कॉलेज की टॉपर बनीं। इसके बाद उन्होंने JNU से PhD करते समय देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा की तरफ अपना रुख किया। अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने बीच में ही अपनी PhD की पढ़ाई छोड़ दी और पूरी तरह से UPSC की तैयारी में जुट गईं।
शुरुआती झटके: जब लगातार 4 प्रयासों में प्रीलिम्स भी नहीं हुआ क्लियर
स्कूल और कॉलेज के दिनों में हमेशा शीर्ष स्थान हासिल करने वाली सारिका को इस यात्रा के शुरुआती दौर में भारी असफलताओं का सामना करना पड़ा। साल 2019 से लेकर साल 2022 तक उन्होंने लगातार चार बार UPSC CSE की परीक्षा दी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। इन चारों प्रयासों में वे परीक्षा के पहले चरण यानी प्रीलिम्स को भी पार करने में असफल रहीं।
लगातार चार बार असफलता का सामना करना किसी भी गंभीर अभ्यर्थी को मानसिक रूप से तोड़ सकता है। खुद को साबित करने का दबाव और लगातार मिल रही हार के बाद भी सारिका ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने निराशा के सागर में डूबने के बजाय अपनी कमजोरियों का बारीकी से विश्लेषण किया। उन्होंने हर एक असफलता को एक सीख की तरह लिया और साल 2023 में अपने पांचवें प्रयास के लिए पूरी ताकत झोंक दी।
मानसिक तनाव, FOMO और माइग्रेन के दर्द को मात देकर हासिल की AIR 548
UPSC के अपने पांचवें प्रयास के दौरान सारिका के सामने केवल अकादमिक चुनौतियां ही नहीं थीं, बल्कि वे मानसिक मोर्चे पर भी एक बड़ी लड़ाई लड़ रही थीं। वे लगातार FOMO यानी अपने साथियों से पीछे छूट जाने के डर से जूझ रही थीं। उनके आसपास के दोस्तों का चयन न हो पाना और परीक्षा का बढ़ता दबाव उनके आत्मविश्वास को कमजोर कर रहा था। इस कठिन समय में उन्होंने अपने मन को नियंत्रित किया, अपने अध्ययन के स्रोतों को बेहद सीमित रखा और सोशल मीडिया व बाहरी दुनिया के शोर से खुद को दूर कर लिया।
मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। UPSC मेंस परीक्षा शुरू होने से ठीक 10 दिन पहले सारिका को माइग्रेन का बेहद गंभीर दौरा पड़ा। शारीरिक पीड़ा और मानसिक तनाव के इस दोहरे वार के बावजूद उन्होंने अपने हौसले को डिगने नहीं दिया। उन्होंने परीक्षा दी और अपनी मेहनत के दम पर सफलता का परचम लहराया। अपने 5वें प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक AIR 548 हासिल की और IPS अधिकारी बनने के अपने सपने को सच कर दिखाया।
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