गयाजी: संगीत और साहित्य की मिठास से बदल रही ऑब्जर्वेशन होम के बच्चों की जिंदगी, सुधा मिश्रा की अनोखी पहल करियर 2 घंटे पहले 6
गया जिले की एक शिक्षिका सुधा मिश्रा अपने अनूठे शिक्षण कौशल से ऑब्जर्वेशन होम में रहने वाले बच्चों के भविष्य को नया आकार दे रही हैं। वे पारंपरिक पढ़ाई के बजाय गीत, संगीत और कविता के माध्यम से बच्चों में सकारात्मक बदलाव लाने का काम कर रही हैं।

शिक्षण का एक अनूठा और प्रभावी तरीका

गया जिले के मध्य विद्यालय पिपरा डुमरिया की शिक्षिका सुधा मिश्रा की चर्चा आज पूरे राज्य में है। उनका पढ़ाने का अंदाज बेहद अनूठा है, जो छात्रों को गहराई से प्रभावित करता है। सुधा मिश्रा की वर्तमान में प्रतिनियुक्ति गया ऑब्जर्वेशन होम में की गई है, जहां वह पिछले चार वर्षों से बच्चों को नई राह दिखा रही हैं। वे बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं देतीं, बल्कि गीत, संगीत और कविता जैसे माध्यमों का सहारा लेकर उनकी शिक्षा को मनोरंजक और प्रेरणादायक बनाती हैं। उनके मार्गदर्शन में शिक्षा प्राप्त करने वाले कई बच्चे अब मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। उनमें से कुछ ने बेहतर जीवन जीने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, तो कई बच्चे स्वरोजगार की ओर प्रेरित होकर अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश कर रहे हैं।

राज्य स्तर पर पहचान और सम्मान

सुधा मिश्रा की शिक्षण शैली अब केवल गया जिले की सीमाओं तक ही सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उनकी ख्याति राज्य स्तर पर भी फैल चुकी है। उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें विभिन्न मंचों पर सम्मानित भी किया गया है। पिछले वर्ष विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में नेपाल में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान उन्हें अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक रत्न की प्रतिष्ठित उपाधि से नवाजा गया था। यह सम्मान उन्हें हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ काव्य सृजन के क्षेत्र में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए दिया गया था। इसके अलावा उन्हें आदर्श शिक्षक रत्न सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है, जो उनके समर्पण का प्रमाण है।

शिक्षा और सकारात्मक सोच का मेल

शिक्षिका सुधा मिश्रा का मानना है कि शिक्षा केवल रोजगार पाने की एक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह समाज के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और सोच उत्पन्न करने का एक सशक्त माध्यम है। ऑब्जर्वेशन होम में अपनी कक्षा शुरू करने से पहले, वह हमेशा बच्चों को मोटिवेशनल गीत और कविताएं सुनाती हैं। इसके पीछे उनका मुख्य उद्देश्य बच्चों का ध्यान पूरी तरह से पढ़ाई पर केंद्रित करना और उन्हें मानसिक रूप से अध्ययन के लिए तैयार करना होता है। सुधा कहती हैं कि ऑब्जर्वेशन होम में आने वाले बच्चे अक्सर किन्हीं दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों के कारण शिक्षा और समाज से दूर हो जाते हैं। ऐसे में उन्हें डांटने या टोकने के बजाय, उनके अंदर सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना सबसे ज्यादा जरूरी है।

चार सालों में आया क्रांतिकारी बदलाव

सुधा मिश्रा के अनुसार, पिछले तीन से चार वर्षों के दौरान ऑब्जर्वेशन होम के बच्चों में अत्यंत सकारात्मक परिवर्तन देखे गए हैं। गीत और कविता के जरिए शिक्षण के अलावा, बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों से भी जोड़ा गया है। वे मिट्टी की मूर्तियां गढ़ने के साथ-साथ लकड़ी की नक्काशी और उसे विभिन्न आकार देने का हुनर भी सीख रहे हैं। शिक्षिका बताती हैं कि उनकी बातों और पढ़ाई से प्रभावित होकर बहुत से बच्चे ऑब्जर्वेशन होम से विदा लेने से पहले यह शपथ लेते हैं कि वे भविष्य में कोई भी अनुचित कार्य नहीं करेंगे और हमेशा सही मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराते हैं।

एक बच्चे का जीवन बदलना ही वास्तविक उपलब्धि

सुधा मिश्रा का मानना है कि यदि उनके पढ़ाए गए तौर-तरीकों से एक बच्चा भी गलत राह छोड़कर मुख्यधारा में लौट आता है, तो उनकी मेहनत सार्थक हो जाती है। अधिकांश बच्चे जो ऑब्जर्वेशन होम में आते हैं, वे कई तरह की मजबूरियों के कारण पढ़ाई से दूर हो चुके होते हैं। यदि इन बच्चों को निरंतर शिक्षा के साथ जोड़ा जाए, तो उन्हें अपराध की ओर जाने से रोका जा सकता है। उन्होंने ऑब्जर्वेशन होम में रहते हुए शिक्षा की महिमा नामक एक कविता भी लिखी है। पिछले वर्ष नेपाल में हुई कविता प्रतियोगिता में जब उन्होंने हिस्सा लिया, तो उनकी इस रचना को काफी सराहा गया और सम्मानित भी किया गया। उनकी यह पूरी यात्रा यह सिद्ध करती है कि एक शिक्षक का वास्तविक कार्य केवल पाठ्यक्रम पढ़ाना नहीं, बल्कि भटके हुए बच्चों को नई उम्मीद, आत्मसम्मान और सही दिशा प्रदान करना है। अपनी रचनात्मक और कलात्मक शिक्षण पद्धति से सुधा मिश्रा लगातार बच्चों के भविष्य को सवांरने का नेक काम कर रही हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप