उपनाम: जीआई टैग
पीडिया कला को मिली ग्लोबल पहचान: जीआई टैग से बदलेगी कलाकारों की आर्थिक स्थिति, बढ़ेगा रोजगार
भोजपुर की पारंपरिक पीडिया कला को प्रतिष्ठित जीआई टैग मिल गया है, जिससे इस विलुप्त होती विधा को न केवल नई पहचान मिली है बल्कि कलाकारों की आय और भविष्य के लिए भी सकारात्मक रास्ते खुल गए हैं।
चौसा से जर्दालू तक बिहार के आमों का जलवा, क्या आप जानते हैं राज्य की इन खास किस्मों के बारे में?
बिहार अपनी विविध और स्वाद से भरी आम की किस्मों के लिए दुनियाभर में मशहूर है, जहां पटना के मालदह से लेकर भागलपुर के जर्दालू तक अपनी अलग पहचान रखते हैं।
हिमाचल के 8 पारंपरिक उत्पादों को मिला GI टैग, मंडी की सेपूबड़ी और सिरमौरी लोइया समेत सूची में कई खास नाम शामिल
हिमाचल प्रदेश के आठ पारंपरिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक यानी GI टैग मिल गया है, जिसके बाद राज्य के कुल पंजीकृत विशिष्ट उत्पादों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है।
झुमरी तिलैया का केसरिया कलाकंद: अब पूरी दुनिया में महकेगा झारखंड के इस खास मिठाई का स्वाद
झारखंड के कोडरमा जिले की शान केसरिया कलाकंद को अब प्रतिष्ठित भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग मिल गया है। अमित शाह और राजनाथ सिंह जैसे दिग्गज नेता भी इसके स्वाद के मुरीद हैं और यह मिठाई अब देश से बाहर अमेरिका और ब्रिटेन तक पहुंच रही है।
रतलाम की बालम ककड़ी और गराडू को मिला GI टैग, मालवा के जायके को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले की दो मशहूर कृषि उपजों, बालम ककड़ी और रतलामी गराडू को आधिकारिक रूप से GI टैग प्रदान किया गया है। इस उपलब्धि से क्षेत्र के किसानों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
चिन्नौर चावल: नेहरू और इंदिरा गांधी भी थे जिसके मुरीद, जानिए क्यों है इतना खास
मध्य प्रदेश के बालाघाट में उगाया जाने वाला चिन्नौर चावल अपनी मिठास और खुशबू के लिए जीआई टैग पा चुका है, जिसके दीवाने कभी जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी भी रहे थे.
भोजपुर की बेटी की मेहनत रंग लाई, विलुप्त होती पीडिया-लेखन कला को मिला GI टैग
बिहार की पारंपरिक पीडिया-लेखन कला को आधिकारिक तौर पर जीआई टैग मिल गया है। भोजपुर के जगदीशपुर की कलाकार विनीता कुमारी के अथक प्रयासों ने इस लुप्त होती लोक-कला को नई पहचान दिलाई।
बालाघाट का यह चावल जिसके दीवाने रहे दो-दो प्रधानमंत्री, जीआई टैग मिलते ही विदेशों में बढ़ी मांग, जानें इसकी खूबियां
बालाघाट के वारासिवनी में उगने वाला चिन्नौर चावल अपने मीठे स्वाद और मुलायम बनावट के लिए मशहूर है। साल 2022 में इसे जीआई टैग मिला और अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी पहचान बन रही है।
मुजफ्फरपुर में अब मिलेगा भागलपुर का मशहूर जर्दालू आम, जानें बुकिंग और खरीदारी का पूरा तरीका
भागलपुर के जीआई टैग प्राप्त जर्दालू आम की बिक्री अब मुजफ्फरपुर खादी मॉल में शुरू हो गई है। बढ़ती मांग के बीच ग्राहक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से एडवांस बुकिंग करा सकते हैं।
आम के बाद अब बीज रहित बेदाना लीची का कमाल, BAU सबौर ने किया तैयार; काली मिर्च के दाने जितना कण, शाही से भी बड़ा आकार
बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के वैज्ञानिकों ने बिना बीज वाली बेदाना लीची विकसित की है, जिसमें बीज के नाम पर सिर्फ काली मिर्च के दाने के बराबर कण रहता है और आकार शाही लीची से भी बड़ा होता है। इसके जीआई टैग के लिए भारत सरकार को आवेदन भी भेज दिया गया है।
मखाना बना 'सफेद सोना', जीआई टैग से बदली किस्मत; दरभंगा में 750 किसान कर रहे खेती, एक बीघा में डेढ़ लाख तक मुनाफा
मिथिलांचल के तालाबों में उगने वाला मखाना जीआई टैग मिलने के बाद किसानों के लिए 'सफेद सोना' साबित हो रहा है। पारंपरिक धान-गेहूं छोड़कर किसान अब इस सुपरफूड की खेती से कई गुना ज्यादा कमाई कर रहे हैं।
नॉनवेज प्रेमियों का 'ब्लैक डायमंड' कड़कनाथ: कहां से शुरू हुआ सफर और कैसे करा रहा मोटी कमाई
पूरी तरह काले मांस, त्वचा और हड्डियों वाला कड़कनाथ मुर्गा देशभर में नॉनवेज शौकीनों की पहली पसंद बनता जा रहा है। प्रोटीन से भरपूर और लो-कोलेस्ट्रॉल होने के कारण इसकी कीमत आम चिकन से कई गुना ज्यादा है।
जर्दालू आम बना किसानों की कमाई का जरिया, एक बीघे से 5 लाख तक का मुनाफा और विदेशों तक मांग
भागलपुर का जीआई टैग प्राप्त जर्दालू आम किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बन गया है, जिसकी बागवानी से एक बीघे में करीब पांच लाख रुपये तक की कमाई हो रही है। इसकी मांग अब खाड़ी देशों समेत कई मुल्कों तक फैल चुकी है।
जर्दालु आम के बाद अब भागलपुर की मनराजी लीची की धूम, दुबई-अमेरिका और मॉरीशस तक पहुंची मिठास, 48 घंटे में देशभर डिलीवरी
भागलपुर के नवगछिया की मनराजी लीची अब विदेशी बाजारों में पहचान बना रही है और पिछले दो साल से इसका निर्यात हो रहा है। देश के भीतर ऑर्डर देने पर यह लीची 48 घंटे के अंदर किसी भी कोने तक पहुंचाई जा रही है।