जर्दालु आम के बाद अब भागलपुर की मनराजी लीची की धूम, दुबई-अमेरिका और मॉरीशस तक पहुंची मिठास, 48 घंटे में देशभर डिलीवरी बिहार 3 महीने पहले 48
भागलपुर के नवगछिया की मनराजी लीची अब विदेशी बाजारों में पहचान बना रही है और पिछले दो साल से इसका निर्यात हो रहा है। देश के भीतर ऑर्डर देने पर यह लीची 48 घंटे के अंदर किसी भी कोने तक पहुंचाई जा रही है।

बिहार के भागलपुर की पहचान अब तक यहां के खास जर्दालु आम से रही है, लेकिन अब इस इलाके की लीची भी विदेशी लोगों की पसंद बनती जा रही है। पिछले दो वर्षों से भागलपुर की लीची विदेश भेजी जा रही है और इसे व्यापारियों व किसानों दोनों की ओर से अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। कभी केला, कलाई और अपराध के लिए चर्चित रहा नवगछिया आज लीची के नाम से जाना जाने लगा है।

शाही लीची के बाद मनराजी की बढ़ती पहचान

बिहार वैसे तो कई चीजों के लिए मशहूर है, जिनमें मुजफ्फरपुर की शाही लीची प्रमुख रही है। लेकिन अब धीरे-धीरे नवगछिया की मनराजी लीची भी अपनी अलग जगह बना रही है। जो नवगछिया पहले केला उत्पादन के लिए जाना जाता था, वह अब लीची के लिए प्रसिद्ध होता जा रहा है।

एक किसान की पहल से शुरू हुआ सफर

इस बदलाव की शुरुआत नवगछिया के किसान चंदन सिंह ने की। उन्होंने यहां की लीची को विदेश तक पहुंचाने का काम किया। चंदन खुद का एफपीओ चलाते हैं और लगातार प्रयास कर इस लीची को पहचान दिलाई। पिछले साल यहां से लीची दुबई भेजी गई थी, और इस बार कई देशों के लोग इसका स्वाद चखेंगे।

कई देशों से मिल रहे ऑर्डर

किसान चंदन सिंह बताते हैं कि पिछली बार यहां की लीची के लिए दुबई, सिंगापुर, कतर, ओमान और घाना जैसे देशों से ऑर्डर मिले थे। उनके मुताबिक इस बार दुबई, मॉरीशस और यूएस जैसे देशों से ऑर्डर आए हैं। देश के भीतर की बात करें तो ऑर्डर मिलने पर यह लीची 48 घंटे के भीतर किसी भी कोने तक पहुंच जाती है।

देश के भीतर भी जबरदस्त मांग

बेंगलुरु से इस लीची की अच्छी-खासी मांग बनी हुई है, और कई अन्य राज्यों में भी ऑर्डर के अनुसार लीची भेजी जाएगी। यहां 1 तारीख से लीची तोड़ने का काम शुरू हो जाता है। यह क्षेत्र कोसी और गंगा के बीच में बसा है, जहां दोनों नदियों की मिट्टी एक साथ मिलती है, जिसके कारण इसकी उपज और स्वाद दोनों खास बन जाते हैं।

जीआई टैग की मांग

नवगछिया के तेतरी, तेलघी, सोनबरसा, लत्तीपुर समेत कुछ अन्य स्थानों पर इसकी खेती बड़े पैमाने पर होती है। इसे जीआई टैग दिलाने के लिए लगातार मांग उठ रही है। माना जा रहा है कि जीआई टैग मिलते ही इसकी मांग और बढ़ जाएगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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