मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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रतलाम के कृषि उत्पादों के लिए गौरव का पल
मध्य प्रदेश का रतलाम जिला एक बार फिर अपनी विशेष कृषि संपदा के कारण सुर्खियों में है। जिले की दो प्रमुख उपजों, सैलाना की बालम ककड़ी और प्रसिद्ध रतलामी गराडू को जीआई टैग से सम्मानित किया गया है। रियावन लहसुन के बाद यह उपलब्धि क्षेत्र के किसानों और व्यापारियों के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं है। अब रतलामी गराडू को आधिकारिक रूप से मालवी गराडू के नाम से पहचाना जाएगा।
उत्पादन और किसानों को फायदा
उद्यानिकी विभाग के प्रयासों से मिली यह सफलता रतलाम के कृषि इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ती है। वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक जिले में इन फसलों का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है:
- बालम ककड़ी: जिले में लगभग 100.00 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती की जाती है।
- गराडू: लगभग 120.00 हेक्टेयर जमीन पर गराडू का उत्पादन हो रहा है।
जीआई टैग मिलने से अब इन उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एक अलग पहचान मिलेगी, जिससे स्थानीय किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा।
सैलाना की केसरिया बालम ककड़ी की अनोखी पहचान
सैलाना क्षेत्र में उगने वाली बालम ककड़ी अपनी रसीली प्रकृति के लिए देशभर में मशहूर है। यह ककड़ी पीले, हरे और केसरिया रंगों के मेल से बनी होती है, इसीलिए इसे केसरिया बालम ककड़ी भी कहा जाता है। अपनी विशिष्ट तासीर और स्वाद के कारण यह लोगों की पहली पसंद बनी हुई है।
मालवी गराडू के स्वास्थ्य लाभ
रतलामी गराडू या मालवी गराडू अपने कुरकुरेपन और बेहतरीन स्वाद के लिए जाना जाता है। यह बाहर से कुरकुरा और अंदर से बेहद मुलायम होता है। सेहत की दृष्टि से भी इसके कई फायदे हैं:
- इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन, खनिज और फाइबर पाया जाता है।
- इसमें मौजूद तत्व मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में सहायक हैं।
- इसके एंटीऑक्सीडेंट्स गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
- यह मधुमेह (शुगर) को नियंत्रित करने में भी मददगार माना जाता है।
जीआई टैग मिलने से अब इन उत्पादों की शुद्धता और क्षेत्रीय विशेषता पर मुहर लग गई है, जो रतलाम को वैश्विक कृषि मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगा।
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