बिहार
एक घंटा पहले
2
विचारों
भागलपुर के मशहूर जर्दालू आम की मिठास और इसकी अनूठी सुगंध अब सिर्फ देश तक सीमित नहीं रही, बल्कि विदेशों में भी लोगों को अपना मुरीद बना रही है। खाने में लाजवाब यह आम किसानों के लिए भी बंपर मुनाफे का जरिया साबित हो रहा है। बीते दिनों में इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए किसानों में इसका बगीचा लगाने का उत्साह तेजी से बढ़ा है और लोग सालाना लाखों रुपये कमा रहे हैं।
एक बीघा बगीचे से 4 से 5 लाख की कमाई
भागलपुर के अनुभवी बागवान अशोक चौधरी का कहना है कि पारंपरिक खेती की तुलना में आम की बागवानी कहीं अधिक फायदे का सौदा है, बशर्ते इसे व्यावसायिक और वैज्ञानिक तरीके से किया जाए। उनके अनुसार सही तरीके से की गई बागवानी किसानों की आमदनी कई गुना बढ़ा सकती है।
- पौधों की संख्या: एक बीघा जमीन पर जर्दालू आम के लगभग 20 से 25 पौधे आसानी से लगाए जा सकते हैं।
- लागत और समय: शुरुआत में पौधे को पूरी तरह तैयार होने और फल देने में करीब 3 साल का समय लगता है।
- सालाना मुनाफा: पेड़ बड़े हो जाने के बाद अच्छी देखभाल करने पर एक बीघे के बगीचे से हर साल आराम से 4 से 5 लाख रुपये तक की कमाई हो जाती है।
- कम जोखिम: धान या गेहूं की फसल की तरह इसमें पूरी फसल डूबने का डर नहीं रहता। मौसम की थोड़ी मार पड़ने पर भी किसान करीब 4 लाख रुपये तक कमा लेते हैं।
जीआई टैग के बाद विदेशों में बढ़ी डिमांड
पहले भागलपुर और इसके आसपास के इलाकों में जर्दालू आम के बगीचे काफी सीमित हुआ करते थे, लेकिन अब इनका दायरा बढ़कर 2 हजार एकड़ से अधिक के क्षेत्र में फैल चुका है। जर्दालू आम को जीआई टैग मिलने के बाद से इसकी लोकप्रियता और ब्रांड वैल्यू में जबरदस्त उछाल आया है।
आज भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा अरब देशों यानी खाड़ी देशों समेत कई अन्य मुल्कों में इसकी भारी मांग है। इसी वजह से किसानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के बेहतरीन दाम भी मिल रहे हैं।
क्यों इतना खास है जर्दालू आम
भागलपुर क्षेत्र की विशेष जलोढ़ मिट्टी और यहां की जलवायु जर्दालू आम के लिए प्राकृतिक रूप से सबसे अनुकूल मानी जाती है। यही कारण है कि इस मिट्टी में उगने वाले जर्दालू आम का स्वाद और खुशबू अन्य जगहों से बिल्कुल अलग होते हैं।
इसके अलावा यह आम बेहद सुपाच्य यानी पचने में आसान होता है, जिसके चलते इसे सेहत के लिहाज से भी काफी फायदेमंद माना जाता है।
Comments
0 comment