चौसा से जर्दालू तक बिहार के आमों का जलवा, क्या आप जानते हैं राज्य की इन खास किस्मों के बारे में? बिहार 2 महीने पहले 64
बिहार अपनी विविध और स्वाद से भरी आम की किस्मों के लिए दुनियाभर में मशहूर है, जहां पटना के मालदह से लेकर भागलपुर के जर्दालू तक अपनी अलग पहचान रखते हैं।

बिहार के बागों का समृद्ध इतिहास

बिहार केवल लीची और मखाना के लिए ही नहीं, बल्कि आमों की विविधता के मामले में भी पूरे देश में विशिष्ट स्थान रखता है। राज्य के प्रत्येक जिले में उगने वाले आम अपनी बनावट, स्वाद, खुशबू और मिठास के कारण एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। बिहार की धरती पर पैदा होने वाले कई आमों ने स्थानीय मंडियों से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई है।

पटना के जाने-माने साहित्यकार और बिहार के व्यंजन पुस्तक के लेखक रविशंकर उपाध्याय के अनुसार, बिहार के आमों का इतिहास बहुत पुराना और समृद्ध है। राज्य के हर जिले और यहां तक कि अलग-अलग गांवों की अपनी विशिष्ट आम की किस्में हैं, जो उन्हें अन्य क्षेत्रों से अलग बनाती हैं। यह एक ऐसी विशेषता है जो शायद ही किसी अन्य राज्य में इतने व्यापक स्तर पर देखने को मिले। बिहार में आमों का वर्गीकरण इस आधार पर भी किया जाता है कि कौन सा आम खाने के लिए सर्वोत्तम है और कौन सा आम अचार बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।

जिले-जिले की अलग पहचान

बिहार का हर जिला अपनी खास आम की वैरायटी के लिए जाना जाता है। राजधानी पटना का दूधिया मालदह आम विशेष रूप से चर्चा में रहता है। इसका ऐतिहासिक संबंध सम्राट अशोक के शासनकाल से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि पटना के दीघा इलाके में इन आमों के वृक्षों की शुरुआत उसी कालखंड में हुई थी, और आज भी वहां कुछ ऐसे प्राचीन पेड़ मौजूद हैं जो उस गौरवशाली इतिहास की गवाही देते हैं।

भागलपुर से लेकर चंपारण तक का सफर

भागलपुर जिला अपने मशहूर जर्दालू आम के लिए पूरी दुनिया में ख्याति प्राप्त है। अपनी विशेष खुशबू और अनूठे स्वाद के कारण इस किस्म को जीआई टैग भी मिल चुका है। जर्दालू की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह बिहार की सीमाओं को पार कर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। इसके अलावा पश्चिम चंपारण (बेतिया) और पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) क्षेत्रों में भी जर्दा आम की पैदावार बड़े पैमाने पर होती है।

मधुबनी जिले का कृष्णभोग आम अपनी एक अलग फैन फॉलोइंग रखता है। वहीं, बक्सर का चौसा आम अपनी मिठास के लिए जाना जाता है, जिसका नाम बक्सर के ऐतिहासिक चौसा क्षेत्र से ही पड़ा है। इसके साथ ही मालदह आम की खेती पूरे बिहार में बड़े स्तर पर होती है। भागलपुर के मालदह आम न केवल देश भर में पसंद किए जाते हैं, बल्कि इनका निर्यात भी किया जाता है। मालदह आम की अच्छी पैदावार गोपालगंज, सीवान, भोजपुर, मुंगेर, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल और अररिया जैसे जिलों में भी काफी होती है।

प्रमुख किस्मों की विशेषताएं

बिहार में उगाई जाने वाली आम की किस्मों की अपनी विशेषताएं हैं:

  • जर्दालू आम: इसका गूदा अत्यधिक रसदार, मुलायम और रेशारहित होता है। इसमें प्राकृतिक मिठास काफी अधिक होती है और इसकी सुगंध बहुत तेज और आकर्षक होती है। पकने पर इसका छिलका सुनहरा पीला रंग ले लेता है, और यह फल मध्यम आकार का होता है।
  • मालदह आम: यह बिहार की सबसे व्यापक रूप से उगाई जाने वाली किस्म है। इसका स्वाद अत्यंत मीठा और संतुलित होता है, जो हर उम्र के लोगों को पसंद आता है। यह आम लंबे समय तक ताजा रहता है, जिसके कारण इसे दूर-दराज के बाजारों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है।
  • चौसा आम: यह भारत की सबसे पसंदीदा और स्वादिष्ट किस्मों में गिनी जाती है। इसमें अत्यधिक मिठास होती है, और पकने के बाद यह सुनहरे पीले रंग का हो जाता है। इसकी गुठली काफी पतली होती है।
  • सूरजपुरी आम: यह सीमांचल के इलाकों जैसे पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार और अररिया की एक स्थानीय पारंपरिक किस्म है। यह आकार में छोटा होता है और इसका स्वाद मीठा होने के साथ हल्का खट्टापन लिए हुए होता है।
  • गुलाब खास: अपनी विशिष्ट गुलाब जैसी खुशबू के लिए मशहूर है। पकने पर इसका छिलका पीला और उस पर हल्की लालिमा दिखाई देती है, जो इसे बेहद आकर्षक बनाती है।
  • कृष्ण भोग: इसका गूदा गाढ़ा, मुलायम और लगभग पूरी तरह से रेशारहित होता है। यह एक प्रीमियम किस्म है, जिसका छिलका पकने पर पीला और कहीं-कहीं लालिमा युक्त होता है।

अचार के लिए भी खास इंतजाम

बिहार में आम की ऐसी किस्में भी हैं जिन्हें विशेष रूप से अचार तैयार करने के लिए उगाया जाता है। इनमें रामकेला और देसी (बीजू) आम सबसे प्रमुख हैं। इन किस्मों के आमों का गूदा काफी सख्त होता है और स्वाद में हल्का खट्टापन होता है। इनका उपयोग अचार बनाने में इसलिए अधिक किया जाता है क्योंकि इनका अचार लंबे समय तक सुरक्षित और स्वादिष्ट बना रहता है। यही कारण है कि बिहार के घरों के अलावा कमर्शियल स्तर पर भी इन आमों की मांग हमेशा बनी रहती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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