उपनाम: बस्तर
बस्तर के युवा सागर कश्यप का देसी मुर्गी पालन का अनोखा मॉडल, कम मेहनत में मिल रहा है बंपर मुनाफा
छत्तीसगढ़ के बस्तर में रहने वाले युवा सागर कश्यप ने खेती के साथ मुर्गी पालन को अपनी अतिरिक्त आय का जरिया बनाया है। महज तीन मुर्गियों से शुरू किया गया यह काम अब बड़े मुनाफे के साथ 200 मुर्गों के व्यवसाय में बदल चुका है।
बस्तर की महिलाओं का कमाल: धान और बांस से बनी इको-फ्रेंडली राखियों की धूम, मिठाई बेचकर भी कमा रहीं मुनाफा
छत्तीसगढ़ के बस्तर की महिलाओं ने प्राकृतिक सामग्री से राखियां तैयार कर बाजार में अपनी खास पहचान बनाई है, साथ ही वे राखी के साथ मिठाई बेचकर भी अतिरिक्त कमाई कर रही हैं।
बस्तर की पारंपरिक खेड़ा भाजी का अनोखा स्वाद, दाल के साथ ऐसे बनाएं लजीज सब्जी
बस्तर में बरसात के दौरान मिलने वाली खेड़ा भाजी सेहत और स्वाद का खजाना है, जिसे स्थानीय लोग दाल के साथ मिलाकर बेहद चाव से खाते हैं।
ऐतिहासिक बदलाव: नक्सलियों के गढ़ कर्रेगुट्टा पर पहली बार लहराया तिरंगा, बस्तर में बदली तस्वीर
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर पहली बार राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया गया है, जो कभी माओवादियों का अभेद्य किला माना जाता था। यह पल बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास की नई शुरुआत का प्रतीक बन गया है।
बस्तर में पुलिस की अनूठी पहल: नेतानार कैंप में सिलाई सीखकर महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित नेतानार पुलिस कैंप में सेवा डेरा की शुरुआत की गई है, जहाँ स्थानीय महिलाओं को निशुल्क सिलाई प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी बनाया जा रहा है।
बंदूक छोड़ मुख्यधारा में लौटीं बस्तर की पूर्व महिला नक्सलियों ने रायपुर में किया रैंप वॉक, बटोरीं खूब तालियां
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस कार्यक्रम में बस्तर की पूर्व महिला नक्सलियों ने पारंपरिक परिधानों में रैंप वॉक किया। हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में शामिल हुईं इन महिलाओं के इस नए रूप को देखकर दर्शक दंग रह गए और पूरा हॉल ता...
नक्सलवाद का अंधेरा छंटा, बस्तर के गांवों में 46 साल बाद फहराएगा तिरंगा
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के अति नक्सल प्रभावित गांवों में अब खौफ की जगह तिरंगे की शान ने ले ली है, जहां करीब पांच दशक तक काला झंडा लहराया करता था, वहां अब बच्चे देशभक्ति के नारों के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
छत्तीसगढ़: 92 गांवों में पहली बार लहराएगा तिरंगा, शहीदों के सम्मान में बदले जाएंगे स्कूल और चौराहों के नाम
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा, जहां 92 गांवों में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा और शहीदों को विशेष सम्मान दिया जाएगा।
राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ के बस्तर का दिखा वैभव, द्रौपदी मुर्मू ने मेहमानों को खुद परोसा भोजन
राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ के बस्तर से आए 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पारंपरिक तरीके से अतिथियों को भोजन परोसा।
छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही, 5वीं और 8वीं के सैकड़ों छात्रों को थमा दी गलत मार्कशीट
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में शिक्षा विभाग की भारी चूक सामने आई है, जहां 7 ब्लॉक में 5वीं और 8वीं कक्षा के छात्रों को त्रुटिपूर्ण अंकसूचियां वितरित कर दी गईं। प्रशासन ने इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए दोषी अधिकारियों को नोटिस जारी किया है और नई मार्कशीट...
ज्ञानगुड़ी का कमाल: बस्तर के 50 होनहार बच्चों ने NEET में लहराया परचम, अब बनेंगे डॉक्टर
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में जिला प्रशासन द्वारा संचालित ज्ञानगुड़ी की निःशुल्क कोचिंग ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जहां से 50 से अधिक छात्रों ने NEET परीक्षा पास कर मेडिकल की पढ़ाई का रास्ता साफ कर लिया है।
बैंगन की इस खास किस्म से किसान मालामाल, एक साल तक लगातार मिलेगा बंपर उत्पादन
बस्तर के एक प्रगतिशील किसान ने बैंगन की ऐसी उन्नत किस्म अपनाई है जो तीन महीने के बजाय पूरे साल फल देती है, जिससे लाखों की कमाई हो रही है।
बस्तर में मलेरिया का डरावना रूप, मिक्स मलेरिया के 254 मामलों ने बढ़ाई स्वास्थ्य विभाग की चिंता
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में मलेरिया का संक्रमण तेजी से पैर पसार रहा है, जहां अब तक 8,426 मरीज सामने आए हैं। इनमें से 254 मामलों में 'मिक्स मलेरिया' की पुष्टि हुई है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
बस्तर की प्रभाती भारत बनीं प्रदेश की पहली महिला किसान, उगा रही हैं दुर्लभ लाल और काला चावल
छत्तीसगढ़ के बस्तर की प्रभाती भारत ने खेती में एक नई मिसाल पेश की है, जहां वे व्यावसायिक रूप से लाल और काले चावल की उपज कर रही हैं। इसके साथ ही वे सैकड़ों देसी धान की किस्मों को संरक्षित कर कृषि विरासत को आगे बढ़ा रही हैं।
पुरी से बस्तर तक कैसे पहुंची रथयात्रा की परंपरा? 16 पहियों वाले रथ से जुड़ा गोंचा पर्व का इतिहास
छत्तीसगढ़ के बस्तर में मनाया जाने वाला गोंचा पर्व 600 साल से भी अधिक पुरानी परंपरा है, जिसकी शुरुआत पुरी के 16 पहियों वाले रथ से मानी जाती है।