बस्तर के युवा सागर कश्यप का देसी मुर्गी पालन का अनोखा मॉडल, कम मेहनत में मिल रहा है बंपर मुनाफा छत्तीसगढ़ 2 घंटे पहले 8
छत्तीसगढ़ के बस्तर में रहने वाले युवा सागर कश्यप ने खेती के साथ मुर्गी पालन को अपनी अतिरिक्त आय का जरिया बनाया है। महज तीन मुर्गियों से शुरू किया गया यह काम अब बड़े मुनाफे के साथ 200 मुर्गों के व्यवसाय में बदल चुका है।

मुर्गी पालन से बदली किस्मत

आज के दौर में ग्रामीण क्षेत्रों के युवा स्वरोजगार की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में रहने वाले सागर कश्यप ने कृषि के साथ-साथ मुर्गी पालन को अपनाकर एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। वे मुख्य रूप से खेती करते हैं, लेकिन खाली समय में मुर्गी पालन के जरिए अच्छी आर्थिक उन्नति कर रहे हैं। सागर ने लगभग डेढ़ साल पहले महज तीन मुर्गियों के साथ इस काम की शुरुआत की थी, जो आज बढ़कर करीब 200 मुर्गों तक पहुंच गई है।

कम मेहनत और अधिक लाभ

सागर का कहना है कि मुर्गी पालन का व्यवसाय अन्य कामों की तुलना में काफी सरल है। इसमें बहुत ज्यादा समय या कड़ी मेहनत की आवश्यकता नहीं पड़ती। उनके अनुसार, दिन में केवल सुबह और शाम के समय दाना और पानी देने से काम चल जाता है। इस कारण वे अपने मुख्य कृषि कार्यों के साथ आसानी से इसे संभाल लेते हैं। वे देसी मुर्गों का पालन कर रहे हैं, जिनकी बाजार में भारी मांग बनी रहती है।

देसी मुर्गों की खासियत और बाजार

सागर ने बताया कि देसी किस्म के मुर्गों में बीमारियां होने का खतरा काफी कम होता है, जिससे नुकसान की गुंजाइश भी घट जाती है। इनका मांस स्वाद में लाजवाब होता है, इसलिए ग्राहक इन्हें हाथों-हाथ लेते हैं। विशेष रूप से, जो मुर्गे लड़ाई (कॉकर फाइटिंग) के लिए तैयार किए जाते हैं, वे बाजार में बहुत ऊंचे दामों पर बिकते हैं। सागर ऐसे मुर्गों को खास तौर पर प्रशिक्षित और तैयार करते हैं, जिनकी कीमत बस्तर के स्थानीय बाजारों में 1500 से 2000 रुपये तक मिल जाती है।

लागत और कमाई का गणित

इस व्यवसाय में मुनाफे का गणित भी काफी स्पष्ट है। एक मुर्गी को पूरी तरह तैयार होने में लगभग पांच से छह महीने का समय लगता है। इसे पालने और चारे पर कुल खर्च लगभग 150 रुपये आता है, जबकि बाजार में इसे आसानी से 500 से 600 रुपये तक बेचा जा सकता है। सागर ने अब तक लगभग 100 मुर्गों की बिक्री की है। उन्होंने बताया कि अब तक उन्हें कुल 50,000 से 60,000 रुपये की कमाई हो चुकी है।

मुर्गों का प्रबंधन

सागर ने अपने फार्म में ब्रूडिंग यूनिट भी बनाई है। यहां अंडे देने वाली मुर्गियों के लिए सुरक्षित घोंसले और तापमान का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि चूजों का विकास सही ढंग से हो सके। मुर्गों को स्वस्थ रखने के लिए वे उन्हें संतुलित आहार देते हैं। डेढ़ साल के इस सफर में अभी तक किसी भी प्रकार की बड़ी बीमारी का प्रकोप नहीं दिखा है, जो इस व्यवसाय की सफलता को दर्शाता है। सागर का यह मॉडल उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कम पूंजी और सीमित समय में खुद का रोजगार खड़ा करना चाहते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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