ऐतिहासिक बदलाव: नक्सलियों के गढ़ कर्रेगुट्टा पर पहली बार लहराया तिरंगा, बस्तर में बदली तस्वीर छत्तीसगढ़ एक घंटा पहले 2
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर पहली बार राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया गया है, जो कभी माओवादियों का अभेद्य किला माना जाता था। यह पल बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास की नई शुरुआत का प्रतीक बन गया है।

कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर इतिहास का नया पन्ना

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग ने एक ऐसे ऐतिहासिक क्षण को देखा है जिसकी कल्पना करना भी कुछ साल पहले मुश्किल था। बीजापुर जिले की कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर, जिसे दशकों तक नक्सलियों का सबसे सुरक्षित और खौफनाक ठिकाना माना जाता था, पहली बार शान के साथ तिरंगा फहराया गया है। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि बस्तर अब नक्सलवाद के काले साये से बाहर निकलकर विकास और शांति की एक नई सुबह की ओर मजबूती से बढ़ रहा है।

तीन दिवसीय तिरंगा यात्रा का समापन

यह महत्वपूर्ण आयोजन तीन दिनों तक चली तिरंगा यात्रा का अंतिम चरण था। यह यात्रा नारायणपुर, कोंडागांव, सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जैसे संवेदनशील इलाकों से होकर गुजरी। लगभग 600 किलोमीटर का लंबा सफर तय करने के बाद, इस यात्रा का समापन शुक्रवार को कर्रेगुट्टा की दुर्गम पहाड़ियों पर हुआ। कभी इन वादियों में गोलियों की गूंज और डर का माहौल हुआ करता था, लेकिन इस मौके पर वहां हर तरफ वंदे मातरम् और जय हिंद के नारों की गूंज सुनाई दी।

प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी

इस गौरवशाली कार्यक्रम में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप और पूर्व मंत्री महेश गागड़ा विशेष रूप से उपस्थित थे। उनके साथ सुरक्षा बलों के जवान और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। जब पहाड़ी की चोटी पर तिरंगा फहराया गया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति का सीना गर्व से चौड़ा हो गया और कई लोगों की आंखें इस अभूतपूर्व दृश्य को देखकर नम हो गईं।

उपमुख्यमंत्री ने बताया गौरव का क्षण

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस मौके पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ और बस्तर के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण पल है। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर कभी हिंसा और दहशत का राज था, वहां आज राष्ट्रीय एकता का प्रतीक तिरंगा लहरा रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पहले बस्तर के इन हिस्सों में तिरंगा फहराने के बारे में सोचना भी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और अब हर घर में तिरंगा गर्व से लहराया जा रहा है।

हिड़मा के गढ़ में सुरक्षाबलों की बड़ी जीत

कर्रेगुट्टा की यह पहाड़ी कुख्यात नक्सली कमांडर हिड़मा का गढ़ मानी जाती थी। यह इलाका इतना संवेदनशील था कि आम नागरिक तो दूर, सुरक्षा बलों के लिए भी यहां पहुंचना एक बड़ी चुनौती होती थी। इस स्थान तक पहुंचने के लिए हमेशा कड़ी सैन्य रणनीतियों और बड़े ऑपरेशनों की आवश्यकता होती थी। हालांकि, सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, उनकी अटूट रणनीति और शासन के दृढ़ संकल्प के चलते आज यह इलाका नक्सली प्रभाव से मुक्त होकर देशभक्ति के रंग में पूरी तरह रंगा हुआ नजर आ रहा है। यह घटना बस्तर में सुरक्षा और प्रशासन की एक बड़ी जीत के रूप में देखी जा रही है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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