बैंगन की इस खास किस्म से किसान मालामाल, एक साल तक लगातार मिलेगा बंपर उत्पादन छत्तीसगढ़ एक महीने पहले 49
बस्तर के एक प्रगतिशील किसान ने बैंगन की ऐसी उन्नत किस्म अपनाई है जो तीन महीने के बजाय पूरे साल फल देती है, जिससे लाखों की कमाई हो रही है।

खेती में नई क्रांति

आमतौर पर बैंगन की फसल तीन से चार महीने की होती है, लेकिन आधुनिक कृषि तकनीक और उन्नत किस्मों ने अब पूरी तस्वीर बदल दी है। बस्तर के किसान तुलसी कश्यप ने बैंगन की खेती का ऐसा मॉडल अपनाया है जिससे उन्हें साल भर पैदावार मिल रही है। यह न केवल उनकी आय का मुख्य जरिया बन गया है बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। बैंगन की इस विशेष किस्म के जरिए वे सालाना लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि इसमें बीमारियों का असर भी सामान्य फसलों के मुकाबले काफी कम देखा जाता है।

VNR 212 किस्म का कमाल

किसान तुलसी कश्यप ने बताया कि वे अपने खेत में VNR 212 किस्म के बैंगन उगा रहे हैं। हाईटेक खेती की तरफ कदम बढ़ाते हुए उन्होंने खेती की आधुनिक विधियों का उपयोग किया है। उन्होंने बताया कि इस खेती की शुरुआत के लिए सबसे पहले खेत की एक बार गहरी जुताई की गई और उसके बाद रोटावेटर का उपयोग किया गया। इसके बाद जमीन को बेड के आकार में तैयार किया गया। उनकी खेती के मॉडल में दो बेड के बीच की दूरी 4.5 फीट रखी गई है, जबकि एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच चार फीट की दूरी निश्चित की गई है। इस तरह के वैज्ञानिक प्रबंधन से पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह और पोषक तत्व मिल जाते हैं।

लागत और मुनाफे का गणित

आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह खेती बेहद लाभकारी साबित हो रही है। तुलसी कश्यप के अनुसार, एक एकड़ जमीन पर बैंगन की खेती करने में लगभग एक लाख रुपये का कुल खर्च आता है। इसमें खाद, बीज, जुताई और अन्य जरूरी संसाधन शामिल हैं। इस निवेश के बदले वे एक साल में 6 से 7 लाख रुपये तक की कमाई आसानी से कर लेते हैं। अभी बाजार में बैंगन का भाव 15 से 30 रुपये प्रति किलो के आसपास चल रहा है, जिससे उनकी आय का ग्राफ लगातार ऊंचा बना हुआ है। बैंगन के साथ-साथ वे अपने खेतों में खीरा और भिंडी की फसल भी उगा रहे हैं, जो उनकी आय को और अधिक मजबूती प्रदान करती है।

फसल की देखभाल और सुरक्षा

हाईटेक खेती में खाद का प्रबंधन भी महत्वपूर्ण होता है। तुलसी कश्यप ने बताया कि उन्होंने फसल में डीएपी, गोबर की खाद, माइक्रो राजा और पोटाश का संतुलित मात्रा में इस्तेमाल किया है। हालांकि, अन्य फसलों की तरह इसमें भी फंगस और कीड़े लगने की समस्या होती है, लेकिन VNR 212 में यह समस्या काफी कम देखने को मिलती है। उन्होंने बताया कि कभी-कभी डाउनी मिल्ड्यू और पाउडरी मिल्ड्यू जैसे रोगों का प्रकोप जरूर होता है, लेकिन अगर सही समय पर इनका उपचार किया जाए, तो फसल पूरी तरह सुरक्षित रहती है। सही देखभाल करने पर यह फसल एक साल से अधिक समय तक लगातार पैदावार देने में सक्षम है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप