बस्तर में मलेरिया का डरावना रूप, मिक्स मलेरिया के 254 मामलों ने बढ़ाई स्वास्थ्य विभाग की चिंता छत्तीसगढ़ एक महीने पहले 61
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में मलेरिया का संक्रमण तेजी से पैर पसार रहा है, जहां अब तक 8,426 मरीज सामने आए हैं। इनमें से 254 मामलों में 'मिक्स मलेरिया' की पुष्टि हुई है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

बस्तर में मिक्स मलेरिया का प्रकोप

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में इन दिनों मलेरिया का खतरा गहरा गया है। इस साल की शुरुआत से ही संक्रमण के मामलों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। स्थिति तब और अधिक गंभीर हो गई है जब डॉक्टरों ने मरीजों में 'मिक्स मलेरिया' की पुष्टि की है। इसका सीधा अर्थ यह है कि एक ही मरीज के शरीर में मलेरिया के दो अलग-अलग प्रकार के परजीवी, यानी पी. फाल्सीपेरम और पी. विवैक्स, एक साथ सक्रिय हो गए हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें तो सामान्य मलेरिया की तुलना में यह मिश्रित संक्रमण काफी घातक हो सकता है और इसके उपचार में अधिक सावधानी की आवश्यकता होती है।

आंकड़ों में संक्रमण की स्थिति

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 से लेकर अब तक पूरे बस्तर संभाग में कुल 8,426 मलेरिया मरीज चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 254 ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण मामले हैं जिनमें मिक्स मलेरिया पाया गया है। विभाग ने इस अवधि के दौरान व्यापक अभियान चलाते हुए 6.63 लाख से अधिक लोगों के रक्त के नमूने लेकर उनकी जांच सुनिश्चित की है। विभाग ने स्वीकार किया है कि जांच के इतने बड़े पैमाने के बावजूद संक्रमण की बढ़ती दर चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है।

जिलेवार आंकड़ों का विश्लेषण

बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में संक्रमण की स्थिति काफी असमान है। आंकड़ों के विस्तृत विवरण के अनुसार:

  • बीजापुर जिला सबसे अधिक प्रभावित है, जहां 3,173 मरीज मिले हैं।
  • सुकमा में मरीजों की संख्या 1,686 दर्ज की गई है।
  • दंतेवाड़ा में 1,344 लोग इस बीमारी की चपेट में आए हैं।
  • नारायणपुर में यह आंकड़ा 896 है।
  • बस्तर जिले में 809 मामले सामने आए हैं।
  • कोंडागांव में 329 और कांकेर में 189 मरीजों की पुष्टि हुई है।

मिक्स मलेरिया क्यों और कैसे फैलता है?

मिक्स मलेरिया की स्थिति तब बनती है जब संक्रमित एनोफिलीज मच्छर के काटने से दोनों प्रकार के परजीवी एक साथ व्यक्ति के रक्तप्रवाह में प्रवेश कर जाते हैं। इसके फैलने के पीछे कई मानवीय और पर्यावरणीय कारक जिम्मेदार हैं। मुख्य रूप से घरों के आसपास जलभराव, समय रहते मच्छर के लार्वा को नष्ट न करना, फॉगिंग और कीटनाशक दवाओं के छिड़काव का प्रभावहीन होना और सबसे महत्वपूर्ण, मच्छरदानियों के उपयोग में कमी आना इस बीमारी के प्रसार के प्रमुख कारण हैं।

लक्षण और बचाव के उपाय

डॉक्टरों के अनुसार, मिक्स मलेरिया में मरीज को तेज बुखार के साथ कंपकंपी और ठंड महसूस होती है। इसके अलावा गंभीर सिरदर्द, बार-बार उल्टी होना, अत्यधिक कमजोरी और खून की कमी इसके मुख्य लक्षण हैं। कई बार बुखार थोड़े अंतराल पर वापस लौट आता है, जो स्थिति को और बिगाड़ देता है। यदि समय पर इलाज न मिले, तो यह संक्रमण दिमाग, लिवर और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे अपने आसपास साफ-सफाई रखें और जलभराव न होने दें। रात में सोते समय मच्छरदानी का अनिवार्य रूप से उपयोग करें। यदि बुखार महसूस हो, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच कराएं और अपना इलाज समय पर शुरू करें।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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