बंदूक छोड़ मुख्यधारा में लौटीं बस्तर की पूर्व महिला नक्सलियों ने रायपुर में किया रैंप वॉक, बटोरीं खूब तालियां छत्तीसगढ़ एक घंटा पहले 2
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस कार्यक्रम में बस्तर की पूर्व महिला नक्सलियों ने पारंपरिक परिधानों में रैंप वॉक किया। हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में शामिल हुईं इन महिलाओं के इस नए रूप को देखकर दर्शक दंग रह गए और पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों से निकलकर समाज की मुख्यधारा में शामिल होना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। लेकिन बस्तर की कुछ साहसी महिलाओं ने न केवल इस चुनौती को स्वीकार किया, बल्कि समाज के सामने एक नई मिसाल भी पेश की है। कभी हाथों में बंदूक लेकर जंगलों में भटकने वाली इन पूर्व महिला नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित एक फैशन शो के दौरान रैंप पर उतरकर सबको हैरान कर दिया।

हथियार छोड़ मुख्यधारा में शामिल हुईं बस्तर की बेटियां

छत्तीसगढ़ के बस्तर के घने जंगलों में एक समय था जब ये महिलाएं नक्सली संगठन का हिस्सा थीं और हिंसा के रास्ते पर चल रही थीं। उनके हाथों में हथियारों का बोझ था और जिंदगी अनिश्चितताओं से भरी थी। लेकिन जब उन्होंने हिंसा का मार्ग त्यागने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला किया, तो उनके जीवन की एक नई दिशा तय हुई। आज ये महिलाएं न केवल शांतिपूर्ण जीवन जी रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मंच पर दिखा गजब का आत्मविश्वास

रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के एक विशेष कार्यक्रम में इन पूर्व महिला नक्सलियों ने हिस्सा लिया। 7 अगस्त को आयोजित इस समारोह में जब ये महिलाएं पारंपरिक छत्तीसगढ़ी परिधानों और हथकरघा से बने खूबसूरत कपड़ों को पहनकर रैंप पर उतरीं, तो वहां मौजूद हर शख्स की निगाहें उन पर टिक गईं। पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी इन महिलाओं के चेहरे पर गजब का आत्मविश्वास और सम्मान साफ झलक रहा था। रैंप पर उनके शानदार कदमताल को देखकर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से पूरे हॉल को गुंजायमान कर दिया।

सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जा रहा वीडियो

इस अद्भुत रैंप वॉक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। समाचार एजेंसी ANI द्वारा 13 अगस्त 2026 को साझा किए गए इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे कभी बंदूक थामने वाले हाथ अब देश की कला और संस्कृति को बढ़ावा देने वाले हथकरघा उत्पादों को गर्व से प्रदर्शित कर रहे हैं। इस वीडियो को इंटरनेट पर लोगों का भरपूर प्यार मिल रहा है और लोग इन महिलाओं के इस बड़े बदलाव और हिम्मत की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

यह बदलाव सिर्फ एक फैशन शो या रैंप वॉक तक सीमित नहीं है। यह इस बात का प्रतीक है कि सही अवसर और समर्थन मिलने पर कोई भी व्यक्ति अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकता है। हिंसा की राह छोड़ चुकी ये महिलाएं अब समाज के बीच सम्मानजनक स्थान पा चुकी हैं। हथकरघा उद्योग और स्थानीय कला-संस्कृति से जुड़कर वे आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रही हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियों को भी एक सकारात्मक संदेश मिल रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप