ज्ञानगुड़ी का कमाल: बस्तर के 50 होनहार बच्चों ने NEET में लहराया परचम, अब बनेंगे डॉक्टर छत्तीसगढ़ एक घंटा पहले 3
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में जिला प्रशासन द्वारा संचालित ज्ञानगुड़ी की निःशुल्क कोचिंग ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जहां से 50 से अधिक छात्रों ने NEET परीक्षा पास कर मेडिकल की पढ़ाई का रास्ता साफ कर लिया है।

बस्तर की प्रतिभाओं की नई उड़ान

छत्तीसगढ़ का बस्तर, जो कभी अपनी भौगोलिक चुनौतियों के लिए जाना जाता था, आज वहां के युवा शिक्षा के क्षेत्र में नई इबारत लिख रहे हैं। बस्तर के सुदूर और दुर्गम इलाकों के 50 से अधिक मेधावी छात्रों ने जिला प्रशासन की ओर से संचालित ज्ञानगुड़ी की निःशुल्क कोचिंग के माध्यम से NEET परीक्षा क्वालीफाई करके एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। यह सफलता न केवल इन बच्चों के लिए, बल्कि उनके पूरे समुदाय के लिए एक मिसाल है। अब ये छात्र काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद MBBS और अन्य प्रतिष्ठित मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेकर भविष्य में डॉक्टर बनने की ओर अग्रसर हैं।

ज्ञानगुड़ी: सपनों को नई दिशा देने वाला केंद्र

जिला प्रशासन की यह अनूठी पहल ज्ञानगुड़ी उन बच्चों के लिए एक उम्मीद की किरण साबित हुई है, जिनके पास बड़े शहरों में जाकर महंगी कोचिंग करने के साधन नहीं हैं। ज्ञानगुड़ी न केवल बच्चों को मेडिकल की तैयारी करवाता है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई देता है। एक आंकड़े के अनुसार, अब तक इस केंद्र से पढ़ाई करने वाले 300 से अधिक बच्चे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होकर अपना करियर संवार चुके हैं। यहाँ के छात्र MBBS, BAMS और नर्सिंग जैसे महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं।

छात्रों के अनुभवों से मिली सफलता की सीख

दंतेवाड़ा की रहने वाली प्रेरणा नाग, जिन्होंने इस साल NEET में सफलता हासिल की है, अपने अनुभव साझा करते हुए कहती हैं कि उन्होंने पिछले साल जुलाई से अपनी तैयारी शुरू की थी। उनके अनुसार, ज्ञानगुड़ी के शिक्षकों का मार्गदर्शन अतुलनीय है। प्रेरणा बताती हैं कि स्कूल के समय में उनके कई बुनियादी कॉन्सेप्ट स्पष्ट नहीं थे, लेकिन यहाँ के शिक्षकों ने उन आधारभूत विषयों को इतनी सरलता से समझाया कि उनका आत्मविश्वास लौट आया। उन्होंने अन्य छात्रों को सलाह दी है कि जगदलपुर स्थित इस केंद्र का लाभ उन्हें जरूर लेना चाहिए।

वहीं, एक अन्य सफल छात्रा कृष्ण सेन का मानना है कि ज्ञानगुड़ी की पढ़ाई का स्तर बहुत ऊंचा है। वे बताती हैं, शिक्षक हमें पाठ्यक्रम से भी आगे जाकर तैयारी करवाते हैं और हर सोमवार को बिल्कुल NEET के पैटर्न पर आधारित टेस्ट लिया जाता है। सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक चलने वाली इस कोचिंग की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह पूरी तरह से निःशुल्क है। कृष्ण का सपना है कि वह डॉक्टर बनकर अपने गृह क्षेत्र में वापस लौटे और वहां की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में अपना योगदान दे, क्योंकि उनके गांव में अभी भी चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है।

शिक्षा विभाग और प्रशासन का विजन

ज्ञानगुड़ी के प्रभारी एलेक्जेंडर चेरियन ने इस सफलता के पीछे की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस संस्थान का संचालन शिक्षा विभाग के अधीन किया जाता है। पिछले शैक्षणिक सत्र में 90 बच्चों को विशेष प्रशिक्षण के लिए प्रवेश दिया गया था, जिनमें से 50 से ज्यादा छात्रों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए NEET परीक्षा क्वालीफाई की है। इसके अतिरिक्त, ज्ञानगुड़ी के छात्र राज्य स्तरीय नर्सिंग परीक्षाओं में भी शीर्ष रैंक प्राप्त करने में सफल रहे हैं। जिला प्रशासन का निरंतर मार्गदर्शन और शिक्षकों की कड़ी मेहनत ही है जो बस्तर के सुदूर कोनों से आए इन बच्चों को डॉक्टर बनने का हौसला प्रदान कर रही है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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