बस्तर की महिलाओं का कमाल: धान और बांस से बनी इको-फ्रेंडली राखियों की धूम, मिठाई बेचकर भी कमा रहीं मुनाफा व्यापार 4 घंटे पहले 3
छत्तीसगढ़ के बस्तर की महिलाओं ने प्राकृतिक सामग्री से राखियां तैयार कर बाजार में अपनी खास पहचान बनाई है, साथ ही वे राखी के साथ मिठाई बेचकर भी अतिरिक्त कमाई कर रही हैं।

पर्यावरण के अनुकूल राखियों का निर्माण

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में इन दिनों महिलाओं का हुनर चर्चा का विषय बना हुआ है। जिले के हटपदमुर गांव की महिलाएं इस बार रक्षाबंधन के त्योहार के लिए पूरी तरह से इको-फ्रेंडली राखियां तैयार कर रही हैं। इन राखियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें किसी भी प्रकार के प्लास्टिक या हानिकारक रसायनों का उपयोग नहीं किया गया है। स्थानीय महिलाएं धान, बांस, पालक भाजी और लाल भाजी जैसी प्राकृतिक वस्तुओं का इस्तेमाल कर बेहद आकर्षक राखियां बना रही हैं, जिन्हें बाजार में काफी पसंद किया जा रहा है।

स्वयं सहायता समूह की मेहनत

यह पूरा काम हटपदमुर गांव की महिलाओं के एक स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित किया जा रहा है। इस समूह में कुल दस महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो मिलकर न केवल राखियां बना रही हैं बल्कि उन्हें बाजार तक पहुंचाने का काम भी कर रही हैं। अपनी मेहनत के दम पर इस समूह ने अब तक लगभग 5,000 राखियां बेचकर बाजार में एक मजबूत पकड़ बनाई है। यह प्रयास महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रहा है।

राखी के साथ मिठाई की बिक्री

इन महिलाओं ने केवल राखियों तक खुद को सीमित नहीं रखा है। अतिरिक्त आय अर्जित करने के उद्देश्य से ये महिलाएं अब राखी के साथ-साथ स्वादिष्ट मिठाइयां जैसे बूंदी और गुलाब जामुन भी बनाकर बेच रही हैं। ग्राहकों द्वारा इस पहल को खूब सराहा जा रहा है, जिससे महिलाओं को आय का दोहरा जरिया मिल गया है।

प्रशिक्षण और व्यवसाय की शुरुआत

समूह की सदस्य भूमिका ठाकुर ने बताया कि यह पहला मौका है जब वे इस तरह के व्यवसाय से जुड़ी हैं। उन्हें आरटीसी (RTC) के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण प्राप्त हुआ, जिसके बाद उन्होंने जरूरी सामग्री जुटाई और उत्पादन कार्य शुरू किया। वे पिछले दो महीनों से इस काम में जुटी हुई हैं। उनकी राखियां अपनी अनूठी सजावट और प्राकृतिक तत्वों के कारण लोगों को खूब आकर्षित कर रही हैं। इस समय बांस और धान से तैयार एक राखी की कीमत 50 रुपये निर्धारित की गई है। व्यवसाय के प्रति अपनी खुशी जाहिर करते हुए भूमिका ठाकुर ने कहा कि खुद का काम शुरू करने और उससे मुनाफा कमाने का अनुभव बेहद प्रेरणादायक है, और बाजार में उनके उत्पादों की मांग लगातार बनी हुई है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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