डायबिटीज मरीजों के लिए खतरनाक है दिन का यह समय, जानिए सुबह ब्लड शुगर बढ़ने के कारण और बचाव के उपाय स्वास्थ्य एक महीने पहले 53
डायबिटीज के मरीजों में सुबह खाली पेट ब्लड शुगर बढ़ने के पीछे डॉन फेनोमेनन नाम की प्रक्रिया जिम्मेदार होती है, जिसे सही जीवनशैली से नियंत्रित किया जा सकता है।

सुबह ब्लड शुगर बढ़ने की असली वजह

अक्सर डायबिटीज के मरीज इस बात से परेशान रहते हैं कि रात को हल्का भोजन करने के बाद भी सुबह उनका ब्लड शुगर लेवल अधिक क्यों रहता है। न्यूट्रिशनिस्ट और डाइटिशियन श्वेता पंचाल के अनुसार, इसके पीछे डॉन फेनोमेनन (Dawn Phenomenon) नामक एक प्राकृतिक हार्मोनल प्रक्रिया काम करती है। यह स्थिति आमतौर पर रात के 2 बजे से सुबह 8 बजे के बीच होती है। इस समय शरीर में कोर्टिसोल और ग्रोथ हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो लिवर को अतिरिक्त ग्लूकोज छोड़ने का संकेत देता है। स्वस्थ व्यक्ति का शरीर इसे संभाल लेता है, लेकिन डायबिटीज के मरीज का शरीर इसे नियंत्रित नहीं कर पाता, जिससे सुबह उठते ही शुगर बढ़ा हुआ मिलता है।

शुगर नियंत्रित करने के 5 कारगर तरीके

डाइटिशियन ने सुबह बढ़ते ब्लड शुगर को संभालने के लिए जीवनशैली में 5 महत्वपूर्ण बदलाव अपनाने की सलाह दी है:

  • रात का खाना जल्दी खाएं: कोशिश करें कि रात का भोजन शाम 7 बजे तक पूरा कर लें, क्योंकि देर रात भारी भोजन करने से ग्लूकोज का संतुलन बिगड़ जाता है।
  • पानी से करें शुरुआत: सुबह उठते ही चाय या कॉफी के बजाय सादा पानी पिएं। यह मेटाबॉलिज्म के लिए बेहतर होता है।
  • प्रोटीन युक्त नाश्ता: सोकर उठने के 30 मिनट के भीतर प्रोटीन से भरपूर नाश्ता जरूर करें, ताकि शरीर में ग्लूकोज का स्तर स्थिर रहे।
  • सुबह टहलें: सुबह के समय कम से कम 10 मिनट की सैर करें। शारीरिक गतिविधि से मांसपेशियों को इंसुलिन के बिना ही खून से ग्लूकोज बाहर निकालने में मदद मिलती है।
  • नाश्ता न छोड़ें: नाश्ता न करने से शरीर में कोर्टिसोल का स्तर और भी बढ़ सकता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए नुकसानदायक है।

जीवनशैली में बदलाव है जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि सुबह बढ़ते शुगर के लिए तुरंत दवाओं की खुराक बढ़ाना ही एकमात्र विकल्प नहीं है। शरीर के संकेतों को समझना जरूरी है। दवाओं के साथ साथ यदि आप अपनी दिनचर्या में ऊपर बताए गए सुधार करते हैं, तो ब्लड शुगर लेवल को बेहतर ढंग से मैनेज किया जा सकता है। हमेशा याद रखें कि स्वास्थ्य सुधार केवल दवाओं पर निर्भर नहीं, बल्कि सही आदतों पर भी टिका होता है।

डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

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