वन्यजीव पर्यटन का बड़ा केंद्र बना कोटा संभाग, बाघ-घड़ियाल से लेकर दुर्लभ पक्षियों तक का बसेरा जीवनशैली एक घंटा पहले 2
राजस्थान के कोटा संभाग में फैले घने वन, पहाड़ और घासभूमियां तेंदुआ, बाघ और सैकड़ों पक्षी प्रजातियों का सुरक्षित ठिकाना हैं। दर्रा, रामगढ़ विषधारी और सोरसन जैसे अभयारण्य इसे वन्यजीव पर्यटन का अहम केंद्र बनाते हैं।

राजस्थान का कोटा संभाग प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों की समृद्धि के लिहाज से एक खास पहचान रखता है। यहां के घने जंगल, पहाड़ी इलाके और विस्तृत घासभूमियां अनेक प्रकार के जीव-जंतुओं को आश्रय देती हैं, जिससे यह क्षेत्र जैव विविधता का बड़ा भंडार बन गया है।

अभयारण्यों में वन्यजीवों की भरमार

दर्रा, रामगढ़ विषधारी और सोरसन जैसे अभयारण्य इस संभाग की असली पहचान हैं। इन क्षेत्रों में तेंदुआ, बाघ, भालू, हिरण और चिंकारा जैसे वन्यजीव स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं। इसके साथ ही यहां सैकड़ों प्रजातियों के पक्षी भी सुरक्षित आवास पाते हैं, जो इन जंगलों को और भी समृद्ध बनाते हैं।

प्रवासी पक्षियों और बाघ संरक्षण का गढ़

सोरसन अभयारण्य प्रवासी पक्षियों के लिए खास तौर पर जाना जाता है, जहां हर साल दूर-दराज से अनेक पक्षी पहुंचते हैं। वहीं रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व बाघों के संरक्षण की दिशा में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है और बाघ संरक्षण की गतिविधियों को नई दिशा दे रहा है।

पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मजबूती

ये सभी क्षेत्र सिर्फ जैव विविधता को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पर्यटन, शोध और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी अहम भूमिका निभाते हैं। वन्यजीव पर्यटन से जुड़ी गतिविधियां इस इलाके की क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती हैं और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ाती हैं।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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