उपनाम: प्रवासी पक्षी
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान पर मंडराता अनदेखा संकट, अफ्रीकन कैटफिश से बिगड़ रहा प्राकृतिक संतुलन
पक्षियों के स्वर्ग केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में अफ्रीकन कैटफिश यानी मांगुर मछली का फैलाव जलीय जीवन और प्रवासी पक्षियों के भोजन को नुकसान पहुंचा रहा है, जिससे वन विभाग की चिंताएं गहरा गई हैं।
वन्यजीव पर्यटन का बड़ा केंद्र बना कोटा संभाग, बाघ-घड़ियाल से लेकर दुर्लभ पक्षियों तक का बसेरा
राजस्थान के कोटा संभाग में फैले घने वन, पहाड़ और घासभूमियां तेंदुआ, बाघ और सैकड़ों पक्षी प्रजातियों का सुरक्षित ठिकाना हैं। दर्रा, रामगढ़ विषधारी और सोरसन जैसे अभयारण्य इसे वन्यजीव पर्यटन का अहम केंद्र बनाते हैं।
सिर्फ 10 रुपए में प्रकृति के बीच बिताएं पूरा दिन, बिहार के इस अभ्यारण्य में रोज पहुंचते हैं हजारों सैलानी
बिहार के पश्चिम चम्पारण स्थित सरैयामन वाइल्ड लाइफ सेंचुरी दिसंबर 2025 में नए सिरे से शुरू होने के बाद पर्यटकों की पसंदीदा जगह बन गई है, जहां महज 10 रुपए की एंट्री टिकट में बोटिंग, मिनी सफारी और दुर्लभ पक्षियों के दीदार का मौका मिलता है।
मानसून के अग्रदूतों की वापसी, केवलादेव के मलाह वेटलैंड में ओपन बिल स्टॉर्क के घोंसले बनते ही बढ़ी अच्छी बारिश की आस
भरतपुर के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के मलाह वेटलैंड में मानसून के दूत माने जाने वाले ओपन बिल स्टॉर्क लौट आए हैं और 100 से अधिक पक्षियों ने घोंसले बनाना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञ इसे मानसून के नजदीक आने का संकेत मान रहे हैं।
बलिया का 'सुरहा ताल' बना अंतरराष्ट्रीय 'रामसर साइट', ओपन एयर थिएटर और बर्ड टावर से बदलेगी तस्वीर
बलिया जिले के जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार (सुरहा ताल) को रामसर साइट का दर्जा मिला है। यहां ₹4.99 करोड़ की लागत से ओपन एयर थिएटर, बर्ड वाचिंग टावर और घाटों का विकास किया जा रहा है।