उपनाम: राजस्थान वन्यजीव
35 साल बाद देश में मिला दुर्लभ सांप! बीकानेर के रेगिस्तान में दिखा रहस्यमयी 'दोमुंहा' बोआ
राजस्थान के बीकानेर, चूरू और सीकर इलाके में दुर्लभ सिसतान सैंड बोआ सांप की मौजूदगी दर्ज की गई है। वैज्ञानिक अध्ययन के बाद वन्यजीव विशेषज्ञों ने इस विषहीन प्रजाति की पहचान की है।
वन्यजीव पर्यटन का बड़ा केंद्र बना कोटा संभाग, बाघ-घड़ियाल से लेकर दुर्लभ पक्षियों तक का बसेरा
राजस्थान के कोटा संभाग में फैले घने वन, पहाड़ और घासभूमियां तेंदुआ, बाघ और सैकड़ों पक्षी प्रजातियों का सुरक्षित ठिकाना हैं। दर्रा, रामगढ़ विषधारी और सोरसन जैसे अभयारण्य इसे वन्यजीव पर्यटन का अहम केंद्र बनाते हैं।
सरिस्का में पहली बार दिखा दुर्लभ गोल्डन सांभर, वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह
सरिस्का टाइगर रिजर्व में पहली बार सुनहरे रंग का मादा गोल्डन सांभर देखा गया, जिसे विशेषज्ञ बेहद दुर्लभ मानते हैं। इससे पहले यहां सफेद मोर और चौसिंगा की साइटिंग भी हो चुकी है।
चांवडिया तालाब बना इंडियन फ्लैपशेल कछुओं का पनाहगाह, आबादी 600 के पार पहुंची
भीलवाड़ा के चांवडिया तालाब में स्वच्छ पानी, पर्याप्त ऑक्सीजन और प्राकृतिक भोजन की वजह से इंडियन फ्लैपशेल कछुओं की संख्या करीब 600 तक पहुंच गई है, जबकि प्रदेश के दूसरे इलाकों में इनकी आबादी घट रही है।
जवाई में अब भालुओं का अनोखा नजारा! मां की पीठ पर सवार शावकों ने मोहा पर्यटकों का मन
राजस्थान के जवाई क्षेत्र में एक मादा भालू अपने नन्हे शावकों के साथ नजर आई, जहां शावक उसकी पीठ पर बैठकर जंगल में घूमते दिखे। यह दुर्लभ दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।