बिहार
एक घंटा पहले
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विचारों
कलेक्टर दीदी का निराला अंदाज
बिहार के वैशाली जिले की जिलाधिकारी वर्षा सिंह अपनी कार्यशैली के कारण अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। अमूमन जिलाधिकारी को फाइलों के बीच और सरकारी बैठकों में व्यस्त देखा जाता है, लेकिन वर्षा सिंह का अंदाज बिल्कुल अलग है। कभी बच्चों के बीच पहुंचकर शिक्षिका बन जाना, तो कभी महिलाओं के बीच उनकी सहेली की तरह घुल-मिल जाना और अब किसानों के साथ खेत में उतरकर धान रोपना, उनकी इसी सहजता ने उन्हें 'कलेक्टर दीदी' का नाम दिलाया है। उनकी हालिया तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिनमें वह खेत में धान की रोपनी करती नजर आ रही हैं।
बिदुपुर के खजवत्ता गांव का दौरा
यह पूरा मामला हाजीपुर के बिदुपुर प्रखंड के खजवत्ता गांव का है। डीएम वर्षा सिंह यहां के शहदुल्लापुर धोबौली पंचायत में स्थित एक किसान उमेश राय के खेत पर पहुंची थीं। यह खेत प्राकृतिक खेती के बीआरसी मॉडल के रूप में विकसित किया गया है। जिलाधिकारी ने पहले पूरे खेत का बारीकी से निरीक्षण किया और वहां मौजूद किसानों को खेती के वैज्ञानिक तौर-तरीकों के प्रति जागरूक किया। इसी दौरान उन्होंने अपनी प्रशासनिक व्यस्तताओं को दरकिनार करते हुए खुद खेत में उतरने का फैसला लिया और महिला किसानों के साथ मिलकर श्रीविधि यानी एसआरआई (SRI) पद्धति से धान की रोपनी शुरू कर दी। डीएम को अपने बीच खेत में काम करते देख वहां उपस्थित किसान भी दंग रह गए और उनमें काफी उत्साह दिखा।
किसानों का बढ़ाया आत्मविश्वास
प्रशासनिक प्रमुख को इस तरह मिट्टी से जुड़ा हुआ देखकर स्थानीय किसानों में न केवल आत्मविश्वास बढ़ा, बल्कि उन्हें जिला प्रशासन के साथ अपनापन भी महसूस हुआ। खेत में धान रोपते हुए जिलाधिकारी ने किसानों से आत्मीय संवाद किया और उनकी खेती संबंधी समस्याओं व अनुभवों को ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि वैशाली की अर्थव्यवस्था की मुख्य आधारशिला है और किसानों की आमदनी को बढ़ाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
प्राकृतिक खेती को जन आंदोलन बनाने का आह्वान
डीएम वर्षा सिंह ने किसानों को समय पर धान की बुवाई करने के साथ-साथ उन्नत और प्रमाणित बीजों का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती केवल एक कृषि पद्धति नहीं है, बल्कि यह मिट्टी, पर्यावरण, जल और मानव स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने का एक सशक्त जरिया है। उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों का इस्तेमाल कम करने से खेती की लागत में कमी आती है और भविष्य में यह टिकाऊ कृषि का मुख्य आधार बनेगी।
प्रशासन का समर्थन और सहयोग
जिलाधिकारी के इस दौरे के पीछे का मुख्य उद्देश्य किसानों को यह भरोसा दिलाना है कि वैज्ञानिक और प्राकृतिक खेती के सफर में प्रशासन उनके साथ मजबूती से खड़ा है। आपको बता दें कि बिदुपुर प्रखंड में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कुल 10 क्लस्टरों का गठन किया गया है। इन क्लस्टरों से लगभग 1,250 किसान जुड़ चुके हैं। जिला प्रशासन द्वारा इन किसानों को प्रोत्साहन राशि के रूप में 2,000 रुपये प्रति किसान प्रदान किए जा चुके हैं। डीएम वर्षा सिंह का खेत में उतरकर धान रोपना महज एक दिखावा नहीं है, बल्कि यह जमीनी स्तर पर कृषि योजनाओं के प्रति प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है। उनकी यह सादगी भरी कार्यशैली न केवल वैशाली में, बल्कि अन्य जिलों के लिए भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
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