उपनाम: वन्यजीव पर्यटन
वन्यजीव पर्यटन का बड़ा केंद्र बना कोटा संभाग, बाघ-घड़ियाल से लेकर दुर्लभ पक्षियों तक का बसेरा
राजस्थान के कोटा संभाग में फैले घने वन, पहाड़ और घासभूमियां तेंदुआ, बाघ और सैकड़ों पक्षी प्रजातियों का सुरक्षित ठिकाना हैं। दर्रा, रामगढ़ विषधारी और सोरसन जैसे अभयारण्य इसे वन्यजीव पर्यटन का अहम केंद्र बनाते हैं।
सरिस्का में पहली बार दिखा दुर्लभ गोल्डन सांभर, वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह
सरिस्का टाइगर रिजर्व में पहली बार सुनहरे रंग का मादा गोल्डन सांभर देखा गया, जिसे विशेषज्ञ बेहद दुर्लभ मानते हैं। इससे पहले यहां सफेद मोर और चौसिंगा की साइटिंग भी हो चुकी है।
जंगल सफारी की शुरुआत भारत में यहीं से हुई थी, बेतला नेशनल पार्क का यह इतिहास चौंका देगा
झारखंड का बेतला नेशनल पार्क आज पर्यटकों के बीच मशहूर है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि देश में संगठित जंगल सफारी और वन्यजीव पर्यटन की नींव यहीं रखी गई थी। साल 1966 के आसपास यहां इसकी शुरुआत हुई थी।
कॉर्बेट का कौन सा सफारी जोन है बाघ दिखने में सबसे आगे? बुकिंग, रूट और सफर की पूरी गाइड
उत्तराखंड का जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क प्रकृति और रोमांच के शौकीनों के लिए बेहतरीन ठिकाना है। यहां जानिए ढिकाला, बिजरानी और झिरना जैसे मशहूर सफारी जोन्स की खूबियां और बुकिंग से जुड़ी अहम बातें।
भीषण गर्मी में वन्यजीवों के बीच जंगल सफारी का रोमांच, यूपी का दुधवा नेशनल पार्क है सबसे बेहतरीन विकल्प
लखीमपुर खीरी में स्थित दुधवा नेशनल पार्क गर्मियों में पर्यटकों को जंगल सफारी, घनी हरियाली और दुर्लभ वन्यजीवों का अनुभव कराता है। सैलानी 15 जून तक यहां वन्यजीवों का दीदार कर सकते हैं, इसके बाद यह पार्क बंद हो जाता है।
जवाई में अब भालुओं का अनोखा नजारा! मां की पीठ पर सवार शावकों ने मोहा पर्यटकों का मन
राजस्थान के जवाई क्षेत्र में एक मादा भालू अपने नन्हे शावकों के साथ नजर आई, जहां शावक उसकी पीठ पर बैठकर जंगल में घूमते दिखे। यह दुर्लभ दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।