सावन के महीने में हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा का क्या है महत्व, जानिए धार्मिक और ज्योतिषीय कारण धर्म एक घंटा पहले 4
सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति का समय है, जिसमें सुहागिन महिलाओं द्वारा हरे रंग की चूड़ियां पहनने का खास महत्व होता है। यह परंपरा न केवल सौभाग्य का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति और ग्रहों की ऊर्जा से भी गहराई से जुड़ी हुई है।

सावन और सुहागिनों का खास जुड़ाव

हिंदू धर्म में श्रावण मास को सबसे पवित्र माना गया है। यह पूरा महीना भगवान भोलेनाथ की भक्ति, रुद्राभिषेक और व्रत-उपवास के लिए समर्पित होता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि यदि सावन में श्रद्धालु सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं, तो भगवान शंकर उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इस दौरान प्रकृति में चारों ओर हरियाली छा जाती है, जो जीवन में सकारात्मकता और ऊर्जा का संचार करती है। इसी पवित्र माह में सुहागिन महिलाओं के हरे रंग की चूड़ियां पहनने की परंपरा का बड़ा महत्व है। उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, इसके पीछे कई गहरे धार्मिक और ज्योतिषीय कारण छिपे हैं।

क्यों पहनती हैं महिलाएं हरी चूड़ियां

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के दौरान सुहागिन महिलाओं का हरे रंग के वस्त्र और हरी कांच की चूड़ियां पहनना बहुत शुभ माना जाता है। हरा रंग सुख, संपन्नता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है। कांच की चूड़ियों से आने वाली मधुर ध्वनि को काफी प्रभावशाली माना गया है, जो घर के आसपास मौजूद नकारात्मकता को दूर करने और घर में सुख-शांति बनाए रखने में मदद करती है। माता पार्वती और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भी महिलाएं इस महीने में हरे रंग को विशेष प्राथमिकता देती हैं।

ज्योतिष शास्त्र में हरे रंग का प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र में हरे रंग को बेहद सकारात्मक और शुभ माना गया है। इस रंग का सीधा संबंध बुध ग्रह से बताया जाता है। बुध को बुद्धि, वाणी और आर्थिक समृद्धि का कारक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जब महिलाएं सावन में हरे रंग के कपड़े या चूड़ियां धारण करती हैं, तो उन्हें बुध देव की कृपा मिलती है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति की वाणी में मधुरता आती है और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में संतुलन बना रहता है। यह रंग न केवल सुंदरता बढ़ाता है बल्कि मन को भी शांत रखने में सहायक होता है।

भगवान शिव और प्रकृति का गहरा संबंध

भगवान शिव का प्रकृति के साथ अटूट संबंध है। उन्हें प्रकृति का सबसे बड़ा उपासक माना जाता है। उनका निवास स्थान हिमालय की शांत और निर्मल वादियों में है, जो स्वयं पवित्रता का प्रतीक है। भगवान शिव की पूजा विधि में भी बेलपत्र, धतूरा और भांग जैसी हरी सामग्रियों का अनिवार्य उपयोग किया जाता है। चूंकि सावन का महीना प्रकृति के पूर्ण रूप से खिले होने का समय है, इसलिए इस दौरान हरे रंग का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह रंग हरियाली, संपन्नता और भगवान शिव की कृपा का प्रतीक माना जाता है। अतः सुहागिन महिलाएं इस माह में स्वयं को प्रकृति के करीब और भगवान शिव के प्रति समर्पित दिखाने के लिए हरी चूड़ियां और परिधान धारण करती हैं। यह परंपरा सौभाग्य की कामना के साथ-साथ शिव शक्ति के आशीर्वाद के रूप में निभाई जाती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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