बिना केमिकल के घर पर आम कैसे पकाएं? जानिए तुड़ाई का सही समय और मीठे-रसीले फल का देसी नुस्खा जीवनशैली एक घंटा पहले 2
आम को सही आकार और परिपक्वता पर ही तोड़ना चाहिए और जून का महीना तुड़ाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। भूसा, पुआल या अखबारी गत्ते की मदद से आम को प्राकृतिक रूप से मीठा, पीला और सुरक्षित ढंग से पकाया जा सकता है।

गर्मी का मौसम शुरू होते ही जिस फल का सबसे बेसब्री से इंतजार रहता है, वह है आम। मिठास, खुशबू और स्वाद की वजह से पूरी दुनिया में पसंद किए जाने वाले इस फल को यूं ही फलों का राजा नहीं कहा जाता। लेकिन आजकल बाजार में बिकने वाले कई आमों को जल्दी पकाने के लिए तरह-तरह के केमिकल का सहारा लिया जाता है। इससे न केवल फल का स्वाद बिगड़ता है, बल्कि सेहत पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है।

दूसरी ओर कुछ लोग अपने बगीचे या खेत से आम समय से पहले ही तोड़ लेते हैं, जिसके चलते फल ठीक से पक नहीं पाता और जल्दी सड़ने लगता है। ऐसे में सबसे अहम सवाल यही उठता है कि आम को किस समय तोड़ा जाए और बिना किसी केमिकल के उसे प्राकृतिक तरीके से कैसे पकाया जाए। अगर आप इस बार पूरी तरह शुद्ध, मीठे और कुदरती ढंग से पके पीले आम का आनंद लेना चाहते हैं, तो यह जानकारी आपके बहुत काम आ सकती है।

तोड़ने से पहले आम का सही आकार पहचानें

अक्सर लोग आम का आकार पूरी तरह विकसित होने से पहले ही उसे पेड़ से तोड़ लेते हैं, और यही सबसे बड़ी चूक साबित होती है। अगर फल पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है, तो वह बाद में भी अच्छी तरह नहीं पक पाता। इसलिए आम को हमेशा उसके पूरे आकार और परिपक्वता तक पहुंचने के बाद ही तोड़ना चाहिए।

तुड़ाई के लिए सबसे अच्छा समय

आम की तुड़ाई के लिहाज से जून का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान फल अपनी पूरी परिपक्वता पर पहुंच चुका होता है, जिससे तोड़ने के बाद वह सही ढंग से और स्वाभाविक मिठास के साथ पकता है।

बिना केमिकल आम पकाने का देसी तरीका

घर पर आम को प्राकृतिक रूप से पकाने के लिए केमिकल की कोई जरूरत नहीं है। इसके लिए भूसा, पुआल या अखबारी गत्ते का इस्तेमाल किया जा सकता है। तोड़े हुए आमों को इनके बीच ढककर रख देने से फल धीरे-धीरे प्राकृतिक रूप से पकते हैं और मीठे, पीले व सेहत के लिहाज से सुरक्षित बने रहते हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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