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एक घंटा पहले
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विचारों
खेती में बदलाव का साहसी कदम
खेती के क्षेत्र में समय पर लिया गया एक सही निर्णय किसी भी किसान का भविष्य संवार सकता है। इसका जीता जागता उदाहरण मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के अहमदपुर खेगांव गांव के निवासी त्रिलोक पाटिल हैं। लंबे समय तक पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बाद भी जब उन्हें उचित लाभ नहीं मिला, तो उन्होंने कुछ अलग करने का निर्णय लिया।
जोखिम भरा फैसला और औषधीय हल्दी
त्रिलोक ने औषधीय हल्दी की खेती को अपनी आजीविका का जरिया बनाने का कठिन निर्णय लिया। उस समय उनके इलाके में हल्दी की खेती का चलन बिल्कुल नहीं था, जिसके चलते आसपास के लोग इसे एक जोखिम भरा प्रयोग मान रहे थे। हालांकि, उन्होंने लोगों की बातों पर ध्यान न देकर अपने प्रयोग को जारी रखा।
मुनाफे का बढ़ता दायरा
त्रिलोक ने शुरुआत में केवल 1 एकड़ भूमि पर हल्दी की खेती शुरू की थी। धीरे-धीरे अपनी मेहनत, बेहतर तकनीक और अनुभव के दम पर उन्होंने इसका विस्तार किया और आज वे 4 से 5 एकड़ में हल्दी की पैदावार कर रहे हैं। उनकी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब दूर-दूर से किसान उनसे बीज लेने के लिए आते हैं। इसके अलावा, त्रिलोक अब अन्य किसानों को भी हल्दी की खेती करने के गुण और तकनीक सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रहे हैं।
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