लेस्वा लोंजी: राजस्थान की यह खास सौगात साल में केवल 3 महीने, स्वाद ऐसा कि अचार-चटनी भी पड़ जाएं फीके जीवनशैली 2 घंटे पहले 2
राजस्थान की पारंपरिक लेस्वा लोंजी गर्मियों में सिर्फ तीन महीने बनती है। गृहणी मदनी देवी के मुताबिक राई, सौंफ, मेथी और हींग के तड़के तथा गुड़-अमचूर से तैयार यह खट्टी-मीठी डिश बाजरे की रोटी और दाल-बाटी के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है।

राजस्थान की रसोई अपने देसी ज़ायके और अनोखे पारंपरिक व्यंजनों के लिए पूरे देश में पहचानी जाती है। इन्हीं खास पकवानों में एक नाम है लेस्वा लोंजी, जिसे गुंदे की चटनी के नाम से भी जाना जाता है। अपने खट्टे-मीठे स्वाद और औषधीय गुणों के कारण यह व्यंजन लोगों के बीच खूब पसंद किया जाता है।

इस लोंजी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह पूरे साल उपलब्ध नहीं रहती। यह केवल गर्मियों के मौसम में महज तीन महीनों के लिए ही खाने को मिलती है। इन्हीं दिनों राजस्थान के ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में इसे बड़े चाव से बनाया और खाया जाता है। बाजरे की रोटी, गरमागरम पराठे या फिर पारंपरिक दाल-बाटी के साथ इसका मेल खाने का मज़ा कई गुना बढ़ा देता है।

त्योहारों और खास मौकों की पसंदीदा डिश

गृहणी मदनी देवी बताती हैं कि राजस्थान के कई इलाकों में लेस्वा लोंजी को मुख्य भोजन के रूप में खाया जाता है। गर्मियों में आने वाले त्योहारों, पारिवारिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर मेहमानों की थाली में इसे बड़े उत्साह से परोसा जाता है।

अगर आप भी अपने रोज़मर्रा के सादे भोजन में कुछ नया, चटपटा और पूरी तरह देसी स्वाद जोड़ना चाहते हैं, तो इस सीज़न में राजस्थानी लेस्वा लोंजी को एक बार ज़रूर आज़माएं। इसकी आसान रेसिपी और लाजवाब ज़ायका इसे हर रसोई की खास डिश बना देता है।

सामग्री और तड़के की तैयारी

घर पर स्वादिष्ट लेस्वा लोंजी बनाने के लिए सबसे पहले ताज़े, हरे और मुलायम लेस्वा को पानी से अच्छी तरह धोकर साफ कर लें। इसके बाद उनकी डंठल हटाकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।

अब एक कड़ाही में थोड़ा तेल गर्म करें। तेल अच्छी तरह गर्म होने पर उसमें राई, जीरा, सौंफ, मेथी दाना और चुटकीभर हींग डालकर बढ़िया तड़का लगाएं। जैसे ही इन साबुत मसालों की खुशबू उठने लगे, गैस की आंच धीमी करके हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और धनिया पाउडर डालकर मसालों को हल्का भून लें।

ऐसे लाएं खट्टा-मीठा स्वाद

मसाले भुन जाने के बाद कटे हुए लेस्वा को कड़ाही में डालें और मसालों के साथ अच्छी तरह मिलाते हुए कुछ मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं। इसके बाद स्वादानुसार नमक डालें। लोंजी को उसका पारंपरिक खट्टा-मीठा स्वाद देने के लिए इसमें बारीक कुटा हुआ गुड़ या चीनी मिलाएं। खटास के लिए थोड़ा अमचूर पाउडर भी डालें, जिससे इसका ज़ायका और निखर जाता है।

अब ज़रूरत के अनुसार थोड़ा पानी डालकर कड़ाही को ढक दें और इसे धीमी आंच पर करीब 10 से 15 मिनट तक अच्छी तरह उबलने दें।

स्वाद के साथ सेहत का खज़ाना

जब लेस्वा पूरी तरह नरम हो जाए, गुड़ पूरी तरह पिघल जाए और मसाले उसमें अच्छी तरह समा जाएं, तब गैस बंद कर दें। तैयार लोंजी को कड़ाही से निकालकर कुछ देर ठंडा होने दें। इसका गाढ़ा, रसीला और चटपटा स्वाद हर उम्र के लोगों को बहुत भाता है।

इसे कांच के बर्तन में रखकर कुछ दिनों तक इस्तेमाल किया जा सकता है। खास बात यह है कि यह मारवाड़ी व्यंजन स्वाद के साथ-साथ गर्मियों में शरीर को ठंडक और बेहतरीन पोषण भी देता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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