बिहार
एक दिन पहले
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समिट में पहुंचे मंत्री श्रवण कुमार
बिहार की राजधानी पटना में आयोजित न्यूज़18 इंडिया के डायमंड स्टेट्स समिट बिहार कार्यक्रम में राज्य सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क और ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने हिस्सा लिया। इस मंच से उन्होंने सम्राट सरकार के 100 दिन के कार्यकाल, छात्र आंदोलन, फेक न्यूज और राज्य के विकास जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
आंदोलन की राजनीति और अपना अतीत
पटना में हुए हालिया छात्र प्रदर्शनों के संदर्भ में मंत्री श्रवण कुमार ने अपने पुराने दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि वे खुद भी आंदोलन की उपज हैं और उन्होंने राजनीति का ककहरा लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विचारधारा से सीखा है। उन्होंने पुराने समय का जिक्र करते हुए बताया कि जब वे आंदोलन में सक्रिय थे, तब कई बार उनके पास जेब में पैसे भी नहीं होते थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में लोग उन्हें देखकर रास्ता बदल लेते थे कि कहीं वे उनसे पैसों की मांग न कर बैठें।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में हर नागरिक को आंदोलन करने का पूरा अधिकार प्राप्त है, लेकिन प्रदर्शन का तरीका महात्मा गांधी के दिखाए शांतिपूर्ण मार्ग के अनुरूप ही होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन की आड़ में कुछ असामाजिक तत्वों ने स्थिति का लाभ उठाया और माहौल को खराब करने की कोशिश की। इस दौरान हुई हिंसा में कई पुलिसकर्मी और अधिकारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका उपचार चल रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासन ऐसे उपद्रवी तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में जुटा है।
कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना
राजनीतिक बयानबाजी के दौरान जब उनसे 'कॉकरोच जनता पार्टी' वाली टिप्पणी पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम निर्णय लेने का हक केवल जनता के पास होता है। वहीं कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में उस पार्टी की स्थिति काफी कमजोर हो गई है और राज्य की जनता सब कुछ देख रही है।
नीतीश कुमार के साथ चर्चा और विकास कार्य
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ अपनी हालिया मुलाकात और बातचीत का जिक्र करते हुए मंत्री ने बताया कि उनकी एक दिन पहले ही चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार लगातार सरकारी विकास कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं। वे अलग-अलग योजनाओं की जानकारी लेने के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों का दौरा भी कर रहे हैं, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक सफलतापूर्वक पहुंच सके।
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