समुद्र में जहाजों पर बढ़ते हमले, लाल सागर से काला सागर तक क्यों सहमी है पूरी दुनिया? विश्व एक महीने पहले 54
लाल सागर, होर्मुज जलडमरूमध्य और काला सागर में लगातार हो रहे समुद्री हमलों ने वैश्विक व्यापार और भारत की सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती पेश कर दी है।

समुद्री व्यापार के लिए नया खतरा

दुनिया भर में छिड़ी कई लड़ाइयां अब केवल जमीन तक सीमित नहीं रह गई हैं। युद्ध की नई तस्वीर के केंद्र में अब मिसाइलें और ड्रोन हैं, जो युद्धपोतों को नहीं बल्कि तेल, अनाज और जरूरी सामान ढोने वाले व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहे हैं। यमन के हूती विद्रोहियों ने हाल ही में लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर जो हमला किया, वह केवल एक सैन्य घटना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी खतरनाक रणनीति का हिस्सा है जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। पिछले कुछ महीनों में लाल सागर, होर्मुज जलडमरूमध्य और काला सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री इलाकों में एक जैसे हमले देखे गए हैं, जो वैश्विक सप्लाई चेन को बुरी तरह बाधित कर रहे हैं।

व्यापार है अब युद्ध का असली लक्ष्य

पुराने समय में समुद्री युद्धों का मतलब नौसेनाओं के बीच आमने-सामने की लड़ाई होती थी, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। आधुनिक संघर्षों का केंद्र अब कंटेनर शिप, तेल टैंकर, गैस वाहक और अनाज ले जाने वाले जहाज बन चुके हैं। दुनिया का ज्यादातर व्यापार समुद्र के जरिए ही होता है, जिसमें ईंधन, भोजन, खाद और मशीनरी शामिल हैं। जब किसी बड़े व्यापारिक जहाज पर हमला होता है, तो उसका असर केवल उस विशेष जहाज पर नहीं पड़ता, बल्कि पूरी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता का माहौल पैदा हो जाता है। इसका सीधा असर हर देश की आम जनता पर पड़ता है, क्योंकि इससे सामान की उपलब्धता और कीमतें सीधे प्रभावित होती हैं।

लाल सागर में तनाव का बढ़ता दायरा

हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों ENCELA और LAYLIA को मिसाइलों और ड्रोन के जरिए निशाना बनाया है। इससे पहले हूतियों का ध्यान मुख्य रूप से इजरायल या उसके सहयोगियों से जुड़े जहाजों पर होता था, लेकिन सऊदी टैंकरों पर सीधा हमला यह दर्शाता है कि यह अभियान अब एक नए और अधिक खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुका है। लाल सागर वैश्विक समुद्री मार्गों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को स्वेज नहर से जोड़ता है। यदि इस मार्ग पर खतरा बना रहता है, तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी छोर यानी केप ऑफ गुड होप के जरिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इस बदलाव से यात्रा की दूरी हजारों किलोमीटर बढ़ जाती है, जिससे ईंधन की खपत, माल ढुलाई का खर्च और बीमा प्रीमियम में भारी उछाल आता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य की संवेदनशीलता

अगर लाल सागर का मार्ग महत्वपूर्ण है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक ऊर्जा बाजार की सबसे संवेदनशील नस माना जाता है। दुनिया भर में समुद्री रास्ते से होने वाले तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे मार्ग से होकर गुजरता है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस क्षेत्र में कई व्यापारिक जहाज पहले ही हमलों, ड्रोन गतिविधियों और विस्फोटक नौकाओं के खतरे का सामना कर चुके हैं। इस जलडमरूमध्य में जरा सी भी हलचल का असर तुरंत वैश्विक तेल बाजार में दिखाई देने लगता है। शिपिंग कंपनियां सुरक्षा के लिए मार्ग बदलने पर मजबूर हो जाती हैं, बीमा कंपनियों द्वारा प्रीमियम बढ़ा दिया जाता है, और अंततः कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखी जाती है, जो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला देती है।

काला सागर में सुरक्षा के नए सवाल

रूस-यूक्रेन संघर्ष ने काला सागर को व्यापारिक जहाजों के लिए एक अत्यंत जोखिम भरा क्षेत्र बना दिया है। बंदरगाहों और अनाज टर्मिनलों पर हो रहे हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आपूर्ति लाइनें अब सीधे तौर पर युद्ध का हिस्सा बन चुकी हैं। इस संघर्ष के दौरान यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से निकल रहे मालवाहक जहाज MV Golden Leo पर हुए हमले में चार भारतीय नाविकों की दुखद मृत्यु हो गई थी। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि युद्ध से सीधे तौर पर जुड़े नहीं होने के बावजूद, नागरिक नाविक अब सबसे खतरनाक मोर्चे पर तैनात हैं और उन्हें अपनी जान का जोखिम उठाना पड़ रहा है।

भारत के लिए चिंता का विषय

इन हमलों का असर केवल युद्धग्रस्त देशों तक ही सीमित नहीं रहता। समुद्री मार्गों के लंबा होने, बीमा महंगा होने और माल ढुलाई की लागत बढ़ने का सीधा बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ता है। भारत के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर है, क्योंकि भारत न केवल दुनिया के सबसे बड़े समुद्री व्यापार वाले देशों में से एक है, बल्कि बड़ी संख्या में भारतीय नाविक वैश्विक स्तर पर काम कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय नाविक काला सागर और होर्मुज क्षेत्र में हुए हमलों के शिकार हुए हैं। इसलिए, यह केवल एक विदेशी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और हमारे बहादुर नाविकों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ एक गंभीर राष्ट्रीय सरोकार है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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