बरसात में मिलने वाली दुर्लभ सब्जी पटपुड़ा: स्वाद और सेहत का अनूठा मेल जीवनशैली 2 घंटे पहले 2
बैगा आदिवासी समुदाय द्वारा वनों से खोजी जाने वाली पटपुड़ा सब्जी न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि यह पोषण का भी बड़ा भंडार मानी जाती है।

पटपुड़ा की खासियत

बरसात के सीजन में जंगलों के भीतर उगने वाली पटपुड़ा या पुटू एक अत्यंत दुर्लभ और स्वादिष्ट जंगली सब्जी है। यह विशेष रूप से बैगा आदिवासी समुदाय द्वारा घने जंगलों की खाक छानकर एकत्रित की जाती है। यह सब्जी मुख्य रूप से सर्रई के पेड़ों के नीचे जमीन के अंदर पनपती है, जिसके कारण इसे ढूंढकर बाहर निकालना काफी मेहनत भरा और चुनौतीपूर्ण काम होता है।

आजीविका का जरिया और कीमत

आदिवासी समुदाय के लिए पटपुड़ा केवल एक मौसमी भोजन नहीं है, बल्कि उनकी कमाई का एक अहम माध्यम भी है। बारिश के दौरान इसकी बाजार में मांग बहुत अधिक बढ़ जाती है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह सब्जी बाजार में 800 से 1200 रुपए प्रति किलो तक के भाव पर बेची जाती है।

बनाने की विधि

इस स्वादिष्ट सब्जी को तैयार करने के लिए सबसे पहले पटपुड़ा को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर छोटे टुकड़ों में काटा जाता है। इसके बाद इसे तेल में भून लिया जाता है। ग्रेवी तैयार करने के लिए प्याज, अदरक और लहसुन के साथ हल्दी, मिर्च और धनिया जैसे मसालों का उपयोग किया जाता है। भूनने के बाद इसमें पटपुड़ा डालकर 5 से 7 मिनट तक धीमी आंच पर पकाया जाता है। इसे अक्सर लोग गरमा-गरम चावल या रोटी के साथ खाना पसंद करते हैं।

सेहत के लिए फायदे

पटपुड़ा को पोषक तत्वों का खजाना कहा जाता है। इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, विटामिन और आयरन पाया जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इसका सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में काफी प्रभावी होता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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