जीवनशैली
13 घंटे पहले
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विचारों
भरतपुर का देसी कलाकंद आज भी अपनी शुद्धता और बेमिसाल स्वाद के लिए जाना जाता है। तमाम आधुनिक और चमक-दमक वाली मिठाइयों के बीच यह पारंपरिक मिठाई आज भी लोगों के दिल में खास जगह बनाए हुए है।
कैसे तैयार होता है यह खास कलाकंद
इस कलाकंद को बनाने के लिए ताजे दूध को धीमी आंच पर घंटों तक पकाया जाता है, जिससे दानेदार मावा तैयार होता है। यही दानेदार मावा इस मिठाई के स्वाद और बनावट को खास बनाता है।
मेहनत और धैर्य की मिठाई
इसे बनाने में मेहनत के साथ-साथ काफी धैर्य की भी जरूरत पड़ती है, क्योंकि इसके अच्छी तरह जमने में 10-12 घंटे का समय लगता है। स्थानीय हलवाई किसी भी आधुनिक शॉर्टकट का सहारा लिए बिना इसे पूरी तरह पारंपरिक तरीके से तैयार करते हैं।
त्यौहारों और मेहमानों की पहली पसंद
त्यौहारों के मौके पर और घर आए मेहमानों के स्वागत के लिए यह कलाकंद सबसे पहली पसंद माना जाता है। बदलते दौर और नई-नई मिठाइयों के बावजूद अपनी शुद्धता और स्वाद के दम पर भरतपुर का देसी कलाकंद आज भी सबका दिल जीत रहा है।
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