उदयपुर के विद्यार्थियों का कमाल: 'दृष्टि' डिवाइस बनेगी नेत्रहीनों की राह का सहारा, जानें पूरी जानकारी राजस्थान एक घंटा पहले 2
उदयपुर के MPUAT के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के छात्रों ने एआई आधारित स्मार्ट डिवाइस 'दृष्टि' तैयार की है, जो कैमरा और ऑडियो तकनीक के जरिए नेत्रहीन लोगों को आसपास की वस्तुओं, व्यक्तियों और बाधाओं की जानकारी देती है। यह डिवाइस 20 से 30 मीटर दूर तक मौजूद चीजों की पहचान करने में सक्षम है।

क्या कोई दृष्टिबाधित व्यक्ति बिना देखे अपने आसपास की चीजों को बेहतर ढंग से पहचान सकता है? क्या तकनीक उसके लिए आंखों की भूमिका निभा सकती है? इन्हीं सवालों का उत्तर खोजने की कोशिश उदयपुर के महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT) के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के विद्यार्थियों ने अपने नवाचारी प्रोजेक्ट "दृष्टि" के माध्यम से की है।

छात्रों द्वारा विकसित यह एआई आधारित स्मार्ट डिवाइस खासतौर पर नेत्रहीन लोगों की सहायता के लिए तैयार की गई है। इस प्रोजेक्ट का मकसद दृष्टिबाधित व्यक्तियों को रोजमर्रा के जीवन में अधिक आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें पारंपरिक छड़ी पर निर्भरता से राहत देना है।

किन छात्रों ने तैयार की 'दृष्टि'

प्रोजेक्ट दृष्टि को इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के छात्र पुलकित पुरबिया, मनन जैन, नकुल जैन, प्रीविनायक सिंह और रजत मीणा ने मिलकर विकसित किया है। इन विद्यार्थियों ने तकनीक को सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए ऐसा समाधान तैयार किया है, जो नेत्रहीन लोगों के जीवन को आसान बना सकता है।

कैसे काम करती है यह डिवाइस

यह एक स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसमें कैमरा, ईयरफोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। डिवाइस का कैमरा सामने मौजूद वस्तुओं, व्यक्तियों या बाधाओं की पहचान करता है। इसके बाद एआई तकनीक इन वस्तुओं का विश्लेषण करती है और ईयरफोन के जरिए उपयोगकर्ता तक ऑडियो संदेश के रूप में जानकारी पहुंचाती है।

छात्रों के अनुसार यह सिस्टम लगभग 20 से 30 मीटर की दूरी तक मौजूद वस्तुओं को पहचानने में सक्षम है। इससे नेत्रहीन व्यक्ति को पहले ही पता चल जाता है कि उसके सामने सड़क, वाहन, दीवार, कोई व्यक्ति या अन्य बाधा है। यह सुविधा उसे सुरक्षित और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में मदद करती है।

क्यों आई ऐसी डिवाइस बनाने की सोच

प्रोजेक्ट तैयार करने वाले विद्यार्थियों ने बताया कि नेत्रहीन लोगों को दैनिक जीवन में कई चुनौतियों से जूझना पड़ता है। खासकर आवागमन के दौरान उन्हें छड़ी के सहारे चलना पड़ता है, जिससे कई बार सीमित जानकारी ही मिल पाती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ऐसा स्मार्ट समाधान बनाने का प्रयास किया, जो तकनीक के सहारे उनकी मदद कर सके।

नेत्रहीन विद्यालय में हुआ परीक्षण

प्रोजेक्ट की उपयोगिता परखने के लिए छात्रों ने उदयपुर स्थित नेत्रहीन विद्यालय में जाकर इसका परीक्षण भी किया। परीक्षण के दौरान छात्रों और शिक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। कई उपयोगकर्ताओं ने इसे उपयोगी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बताया।

हजारों लोगों के जीवन में बदलाव की उम्मीद

विद्यार्थियों का मानना है कि यदि भविष्य में इस तकनीक को बड़े स्तर पर विकसित कर व्यावसायिक रूप से उपलब्ध कराया जाए, तो यह हजारों नेत्रहीन लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। प्रोजेक्ट दृष्टि न केवल तकनीकी नवाचार का उदाहरण है, बल्कि एक ऐसी सामाजिक पहल भी है, जो तकनीक को मानवता की सेवा से जोड़ने का काम कर रही है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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